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इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली सर्द रात… जब एक तरफ इंसान ने मानवता को दफन कर दिया, और दूसरी तरफ एक बेजुबान कुतिया ने बचा ली नवजात बच्ची की जान

छत्तीसगढ़ के खेत से आई वो तस्वीर जो दुनिया को सिखा गई असली इंसानियत

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इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली सर्द रात… जब एक तरफ इंसान ने मानवता को दफन कर दिया, और दूसरी तरफ एक बेजुबान कुतिया ने बचा ली नवजात बच्ची की जान — छत्तीसगढ़ के खेत से आई वो तस्वीर जो दुनिया को सिखा गई असली इंसानियत

छत्तीसगढ़ के एक सूनसान खेत में, जहाँ ठंडी रात की खामोशी इंसानों के दिलों की निर्दयता की गवाही दे रही थी, एक नवजात बच्ची सूखी घास के बीच पड़े–पड़े अपनी अंतिम सांसों से जूझ रही थी। न माँ की गोद थी, न चादर की गर्माहट, न दूध की मिठास, बस शरीर को चीर देने वाली सर्दी और चारों ओर पसरा हुआ मौत जैसा सन्नाटा। किसी क्रूर इंसान ने उसे जन्म लेते ही इस निर्दयी दुनिया के भरोसे छोड़ दिया था, उसे यह भी एहसास न हुआ कि जिस जीवन को वह तुच्छ समझकर छोड़ रहा है, वह किसी माँ की सबसे कीमती धरोहर है। लेकिन उसी खेत में, अपनी ममतामयी छाती में पिल्लों को छुपाए, एक सड़क की बेजुबान कुतिया, जिसे आज दुनिया indian pariah dog के रूप में पहचानती है, अपने पिल्लों के साथ रात गुज़ार रही थी। तभी खेत की निश्छल हवा में उस मासूम के रोने की आवाज गूँजी, एक ऐसी पुकार जो किसी कठोर दिल को भी पिघला सकती थी, लेकिन उसका असर उस कुतिया के दिल पर हुआ — वह धीरे से उठी, संवेदनशील होकर आवाज की दिशा में बढ़ी, सूंघकर उस रोती बच्ची तक पहुँची, और बिना यह जाने कि वह इंसान की संतान है, उसे अपने बच्चों के बीच उसी आत्मीयता से लिटा लिया जैसे वह भी उसका अपना पिल्ला हो। पूरी रात वह कुतिया अपने पिल्लों को दूध पिलाती रही, और उसी के साथ उस नवजात बच्ची को अपने शरीर से चिपकाकर अपने रोम–रोम से गर्मी देती रही, ताकि ठंड उसे निगल न ले। सुबह जब खेत के पास से गुज़रते ग्रामीणों ने बच्ची को कुतिया और पिल्लों के बीच सुरक्षित देखा, तो पूरी बस्ती स्तब्ध रह गई — जिस जीवन को इंसान ने अस्वीकार कर दिया, उसी जीवन को एक जानवर ने अपनी ममता से स्वीकार कर लिया। उस सुबह खेत मानो एक अदालत बन गया, जिसमें इंसान आरोपी था और जानवर गवाह — फैसले में हार इंसान की हुई और जीत मानवता की। यह अद्भुत दृश्य दुनिया को झकझोर गया और यह संदेश दे गया कि इंसानियत किसी प्रजाति की मोहताज नहीं होती, वह एक भाव है, एक संवेदना है, जो कभी मनुष्य खो देता है और कभी एक जानवर पा लेता है। ग्रामीणों की भीड़ में से किसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह खबर फैलाने के लिए वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, और देखते–देखते यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। इस मामले ने एक बार फिर प्रशासन और समाज से सवाल पूछा कि क्या आधुनिक सभ्यता इंसानियत से बड़ी हो गई है? क्या पद, प्रतिष्ठा और सामाजिक दिखावा ही मानवता का विकल्प बन चुके हैं? इस घटना के प्रकाश में आते ही छत्तीसगढ़ के बाल संरक्षण कार्यकर्ताओं ने इसे संज्ञान में लेते हुए यह सुनिश्चित किया कि बच्ची को सुरक्षित संरक्षण मिले और उसे चिकित्सा सहायता पहुँचाई जाये। वहीं स्थानीय पशु–प्रेमियों ने उस कुतिया के लिए भोजन और आश्रय की व्यवस्था करनी शुरू कर दी, ताकि जिसने पूरी रात बच्ची को बचाया, उसकी भी जिंदगी सुरक्षित रह सके। वादी, रिपोर्टिंग तंत्र और जन–स्वर इस समय एक ही प्रार्थना कर रहा है — ईश्वर उस नवजात बच्ची को नया घर, प्रेम और सम्मान दे, और उस बेजुबान कुतिया को भी कोई ऐसा संरक्षक दे जो उसकी वफादारी और दया का मान रख सके। यह घटना एक मार्मिक याद बनकर समाज को चेतावनी देती है कि जिस सभ्यता में करुणा न हो, वह सभ्य कहलाने की हकदार नहीं। यह कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है, जिसने खेत की घास से उठकर दुनिया के हर संवेदनशील दिल तक दस्तक दे दी है।


रिपोर्ट : अलिक सिंह

संपादक – Vande Bharat Live TV News
ब्यूरो प्रमुख – Dainik Aashanka Bulletin
संपर्क : 8217554083

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