
11 शोधपत्रों ने बदली सोच! ज्ञानोत्सव 2025 बना मील का पत्थर
दरभंगा, 29 नवंबर 2025ः—दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में अनादि फाउंडेशन, पिंडारूच द्वारा आयोजित ‘ज्ञानोत्सव 2025’ का प्रथम दिवस ज्ञान, शोध और नवाचार की दृष्टि से अत्यंत सार्थक और प्रभावशाली रहा। जिस उद्देश्य के साथ इस आयोजन की आधारशिला रखी गई थी, आज उसके परिणाम स्पष्ट दिखाई दिए। यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक समारोह भर नहीं, बल्कि मिथिला की बौद्धिक पहचान को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम है, जिसमें शिक्षा, तकनीक और सामाजिक विकास को जोड़ने का महत्व स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया।

उद्घाटन सत्र में पद्मश्री सम्मानित एवं आईआईएम अहमदाबाद के प्रख्यात प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता द्वारा दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत ने पूरे वातावरण में गंभीरता और गरिमा का संचार किया। प्रोफेसर गुप्ता ने प्रथम गुलाब प्रशांत स्मृति व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए जमीनी स्तर पर नवाचार और ग्रामीण भारत में मौजूद छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचानने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शोध का उद्देश्य केवल पुस्तकालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।

इसके बाद आयोजित तीन महत्वपूर्ण सत्रों में तकनीक एवं विकास, कृषि, पलायन और रोजगार की चुनौतियाँ, तथा नीतियों के मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चिंतन-मनन हुआ। कुल 11 शोधपत्रों की प्रस्तुति ने यह साबित किया कि युवाओं में शोध के प्रति रुचि बढ़ रही है और वे जमीनी समस्याओं के समाधान पर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सांस्कृतिक संध्या में निरालाज स्टाइल ऑफ डांस की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों के बीच उत्साह और नई उमंग को जन्म दिया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर अनादि फाउंडेशन के संरक्षक प्रदीप कान्त चौधरी ने सभी सम्मानित अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए दूसरे दिन की सफलता के प्रति विश्वास व्यक्त किया।

निस्संदेह, ‘ज्ञानोत्सव 2025’ मिथिला की बौद्धिक विरासत को सुदृढ़ करने वाला ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी आयोजन सिद्ध होगा, जो भविष्य में भी शोध और नवाचार की मजबूत नींव तैयार करेगा।







