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विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा द्वारा गीता जयंती पर कार्यक्रम आयोजित

FB IMG 1763364401823 1सागर/वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664* विवेकानंद केंद्र शाखा सागर द्वारा वरदान होटल के सभागार में गीता जयंती पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया । अतिथियों द्वारा स्वामी विवेकानंद और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ ।मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्यप्रान्त सामाजिक समरसता के संयोजक सुनील देव ने कहा कि गीता हमें संदेश देती है कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कर्म-क्षेत्र का कितना महत्व है। गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसके यदि एक श्लोक को ही यदि जीवन में उतार लिया जाए तो सफलता प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता। गीता ही एक मात्र ऐसा ग्रन्थ है जिसका पूरे विश्व में अध्ययन किया जा रहा है । उन्होंने कहा की हमें अपने परिवारों में, विद्यालय व महाविद्यालयों में बच्चों, युवाओं को गीता के स्वाध्याय के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है ताकि मनुष्य निर्माण से राष्ट्र का पुनरुत्थान हो सके। मुख्य वक्ता डॉ किरण आर्य सहायक प्राध्यापक, संस्कृत विभाग, डॉ हरिसिंह गौर विवि ने कहा कि गीता जयंती का आयोजन यह संदेश देता है कि भारत की सनातन परंपरा कितनी समृद्ध रही है। भगवत गीता हमें मनुष्यता का बोध कराते हुए कैसे अपना जीवन संयमित रखना है, कैसे अपने कर्म में कुशलता रखनी है यही सब गीता हमें सिखाती है, उन्होंने गीता के विभिन्न श्लोकों के अर्थ को समझाते हुए बताया की आज युवाओं की दैनिक दिनचर्या अव्यवस्थित हो गईं है, गीता सिखाती है कि अगर हमें अपने जीवन के प्रत्येक कार्यक्षेत्र में सफल होना है तो हमारा जागरण सूर्योदय के पहले होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी को अवसाद से मुक्त कराना है उसके चित्त में गीता को पहुंचाना होगा। इसे ध्यानस्थ , कंठस्थ और हृदयस्थ करने से ढेर सारी आपदाओं से मुक्ति मिल सके । उन्होंने कहा कि दरअसल गीता आत्मा का भोजन है। गीता रोग भी बताती है, औषधि भी बताती है और मानव मन का उपचार भी करती है। हमारे जीवन का विषाद, प्रसाद बन जाये यही तो गीता जी के आश्रय का फल है। विशिष्ट अतिथि डाॅ.मनीष झा, अस्थि रोग विशेषज्ञ ने बताया की जीवन जीने की दिव्यतम, भव्यतम कल्पना का साकार रूप ही श्रीमद्भगवद्गीता है। संसारिक संघर्ष में जीवन की ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान गीता से न प्राप्त किया जा सके। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश अर्जुन को माध्यम बनाकर हम सभी के लिए दिया है ताकि हम अपने जीवन में समत्व को धारण करते हुए लाभ-हानि में, सुख-दुःख में और सम-विषम परिस्थितियों में आनंदपूर्वक जी सकें। उन्होंने कहा की वर्तमान समय में हम अपने जीवन की बहुत सारी समस्याओं से पीड़ित है। हम केवल अभाव से दुःखी नहीं है अपितु अपने स्वभाव से भी दुःखी है लेकिन इन सबके पीछे के कारणों से भी अनभिज्ञ है। अध्यक्षता कर रहे धर्मेन्द्र शर्मा, नगर संचालक विवेकानंद केंद्र ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा की गीता जयंती मनाना तभी सार्थक होगा जब हम इसका प्रतिदिन अध्ययन कर इसमें कही बातों का अपने जीवन में भी चरितार्थ कर सके। कार्यक्रम में शीतल पटेल ने तीन ओंकार प्रार्थना, स्वागत उद्बोधन अर्जुन सोनवानी, केंद्र परिचय युवा प्रमुख डॉ महेन्द्र शर्मा ने दिया । प्रेरणा गीत इक़बाल जीत सिंह ने और विवेक वाणी चंचल रैकवार ने प्रस्तुत की । कार्यक्रम का संचालन राजकुमारी लोधी ने और आभार प्रदर्शन केंद्र के सम्पर्क प्रमुख डॉ आशीष द्विवेदी ने व्यक्त किया । अंजु श्रीवास्तव के द्वारा शान्ति मन्त्र वाचन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के डॉ प्रदीप शुक्ला, प्रान्त कार्यपद्धति प्रमुख नीलरतन पात्रा, ओमप्रकाश दुबे, रामप्रसाद विश्वकर्मा, सुधीर पाराशर, राजेंद्र श्रीवास्तव,सुप्रिया नवाथे, श्रीराम साहू, दिनेश दुबे, नगर प्रमुख चंद्रप्रकाश शुक्ला, माखन सिंह, गौरव सिंह राजपूत, संदीप रैकवार, नगर के समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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