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अमोदी के राशन दुकान में बड़ा फर्जीवाड़ा…फिंगरप्रिंट लिया गया मगर हितग्राहियों को नहीं मिला राशन,

चित्रसेन घृतलहरे, 05दिसम्बर 2025/सरसींवा/अमोदी।सरसींवा के पास स्थित ग्राम अमोदी की उचित मूल्य (राशन) दुकान में बड़े स्तर पर अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि सेल्समेन और दुकान संचालक मिलकर महीनों से राशन की हेराफेरी और चोरी कर रहे हैं।

फिंगरप्रिंट लिए, कार्ड में एंट्री भी—पर चावल-शक्कर गायब!

ग्रामीणों ने बताया कि बीते महीने उनका फिंगरप्रिंट लिया गया, राशन कार्ड में एंट्री भी कर दी गई, लेकिन चावल और शक्कर नहीं दिया गया। उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया—
“अभी चावल नहीं आया है, बाद में देंगे।”

लेकिन जब हमारी टीम अमोदी पहुँची, तो उस समय दुकान में चावल वितरण जारी था और ग्रामीण लंबी लाइन में खड़े थे। इससे स्पष्ट होता है कि ग्रामीणों को झूठ बोलकर उनका हक छीना गया।

“ये पहली बार नहीं… हर महीने होता है यही खेल”

कई हितग्राहियों ने बताया कि—

कार्ड में पहले से एंट्री कर दी जाती है

स्टॉक खपत दिखा दिया जाता है

लेकिन उन्हें पूरा राशन कभी भी नहीं मिलता

ग्रामीणों का दावा है कि यह लंबे समय से चल रहा संगठित गबन का खेल है, जिसमें सेल्समेन और संचालक दोनों की मिलीभगत है।

राशन का गबन, स्टॉक में हेराफेरी… मामला बेहद गंभीर

अमोदी का यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सीधा आपराधिक अपराध है। इसमें कई महत्वपूर्ण कानून लागू होते हैं

कौन-कौन से कानून लागू होते हैं?

1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013

धारा 33 :

राशन वितरण में धोखाधड़ी

फर्जी एंट्री

स्टॉक गायब करना

लाभार्थियों को निर्धारित राशन न देना
यह धारा दुकान निलंबन, लाइसेंस निरस्तीकरण, भारी जुर्माना और दंड का प्रावधान करती है।

2. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955

स्टॉक में हेराफेरी, कालाबाज़ारी और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर कठोर सज़ा का प्रावधान।

3. आईपीसी (भारतीय दंड संहिता), धारा 420/409

धोखाधड़ी,

सरकारी वस्तुओं का गबन,

विश्वास का आपराधिक दुरुपयोग
ये धाराएँ सीधे लागू होती हैं और जेल तक हो सकती है।

ग्रामीणों की माँग: तत्काल कार्रवाई हो

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है—

सेल्समेन व संचालक का निलंबन

संपूर्ण जांच

पिछले महीनों के स्टॉक का ऑडिट

दोषियों पर आपराधिक केस दर्ज कर कार्रवाई

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

गांव के लोग पूछ रहे हैं—
“जब कई महीनों से शिकायत हो रही थी, तो प्रशासन क्यों मौन बैठा था?”

यदि प्रशासन समय पर जांच करता तो यह बड़ा गबन रोका जा सकता था।

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