

बलौदाबाजार | निजी अस्पतालों की बेलगाम मनमानी, चिकित्सा पेशे की गरिमा को रौंदने वाले कृत्य और आम नागरिकों की जान से खुलेआम खिलवाड़ के खिलाफ अब बलौदाबाजार प्रेस क्लब निर्णायक संघर्ष के मूड में आ गया है।
23 दिसंबर को प्रेस क्लब के समस्त पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ओमकार हॉस्पिटल, डॉ. वसीम रजा, ऋषि शुक्ला और आशीष शुक्ला के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज करने तथा नर्सिंग एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
प्रेस क्लब ने प्रशासन को सीधा, स्पष्ट और अंतिम 7-दिवसीय अल्टीमेटम देते हुए चेताया है—यदि तय समय में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह माना जाएगा कि प्रशासन मूकदर्शक बनकर संरक्षण दे रहा है, और तब सड़क से आंदोलन तक की राह अपनाई जाएगी। इसकी समस्त नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
सरकारी पद का दुरुपयोग, मरीजों को डराकर निजी अस्पताल भेजने का आरोप
ज्ञापन में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और झकझोर देने वाले हैं। आरोप है कि डॉ. वसीम रजा, जो स्वयं शासकीय जिला अस्पताल में पदस्थ थे, वहां आने वाले मरीजों को यह कहकर डराते-भ्रमित करते रहे कि शासकीय अस्पताल में इलाज संभव नहीं है, और उन्हें जबरन अपने पारिवारिक निजी अस्पताल—ओमकार हॉस्पिटल—भेजा जाता था।
यह कृत्य न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमाने की सुनियोजित साजिश बताया गया है।
बंधक बनाकर वसूली, बाउंसरों से मारपीट—इलाज नहीं, दहशत का कारोबार!
मरीज शंभू पटेल के मामले को उदाहरण बनाते हुए कहा गया है कि पूरी तरह सही जबड़े को जानबूझकर टूटा हुआ बताया गया, मरीज को अस्पताल में बंधक बनाकर रखा गया, परिजनों पर मोटी रकम वसूलने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर बाउंसरों के जरिए मारपीट कर परिजनों को बाहर निकाल दिया गया।
ये आरोप साफ करते हैं कि यहां इलाज नहीं, डर और जबरन वसूली का कारोबार चल रहा है।
वेंटिलेटर मरीज रोका गया! एंबुलेंस तक को नहीं छोड़ा—मानवता शर्मसार
सबसे भयावह और अमानवीय आरोप उस घटना से जुड़े हैं, जहां जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे वेंटिलेटर मरीज और उसकी एंबुलेंस को जानबूझकर रोका गया।
आरोप है कि परिजनों को धमकाते हुए कहा गया—“बलौदाबाजार से बाहर कैसे निकलोगे?”
इतना ही नहीं, मरीज और परिजनों को प्रेस क्लब व पत्रकारों के खिलाफ झूठा बयान देने के लिए मजबूर किया गया, ताकि प्रेस को बदनाम कर झूठे मामलों में फंसाया जा सके।
प्रेस क्लब का सवाल है—यदि उस वक्त मरीज की जान चली जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता?
22 मिनट का ऑडियो—सबूत मौजूद, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
प्रेस क्लब ने दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम से जुड़ा लगभग 22 मिनट का ऑडियो उनके पास मौजूद है, जो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हो रहा है।
प्रार्थी राधेलाल पटेल द्वारा उपलब्ध कराए गए इस ऑडियो में ओमकार हॉस्पिटल प्रबंधन, डॉ. वसीम रजा, ऋषि शुक्ला और आशीष शुक्ला की भूमिका स्पष्ट बताई जा रही है।
साथ ही आरोप है कि वीडियो फुटेज को काट-छांटकर तोड़-मरोड़ कर फैलाया गया, ताकि सच्चाई दबे और पत्रकारों को बदनाम किया जा सके।
पूर्व में भी पत्रकारों के विरुद्ध झूठी व भ्रामक शिकायतें कर उन्हें फंसाने का प्रयास किया गया था।
जांच पूरी, कार्रवाई शून्य—स्वास्थ्य विभाग भी कटघरे में
ज्ञापन में उल्लेख है कि—
मोहनलाल अग्रवाल (रायपुर) की शिकायत की जांच तीन डॉक्टरों की समिति कर चुकी है।
गोरेलाल पटेल (बसंतपुर) प्रकरण की जांच SDM, SDOP और सिटी कोतवाली स्तर पर पूरी हो चुकी है।
राधेलाल पटेल (गिरौधपुरी) ने भी अति संवेदनशील शिकायत दर्ज कराई है।
इसके बावजूद आज तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं—यह स्थिति प्रशासन की मंशा और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब यह सिर्फ पत्रकारों का नहीं, जनता की सुरक्षा का सवाल
प्रेस क्लब ने दो टूक कहा—पत्रकारों का काम सच सामने लाना है।
मरीजों की जान को मोहरा बनाकर प्रेस को बदनाम करने की साजिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह मामला अब आम जनता की सुरक्षा, कानून के राज और मानवता का है।
यदि 7 दिनों के भीतर FIR और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तय है—जिसकी गूंज जिला मुख्यालय से लेकर राज्य स्तर तक सुनाई देगी।










