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व्हाइट क्रिसमस, बर्फ, विश्वास और उल्लास का अनुपम संगम

सागर/वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * संपूर्ण विश्व में 25 दिसम्बर को प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में क्रिसमस का पर्व मनाया जाता है। क्रिसमस ईसाई धर्म का सबसे पवित्र एवं आनंददायक पर्व है। यह पर्व प्रेम, करुणा, क्षमा और भाईचारे का संदेश देता है। जब दिसम्बर में क्रिसमस के समय चारों ओर बर्फ गिरती है और धरती सफेद चादर से ढक जाती है, तब इस उत्सव को ‘‘व्हाइट क्रिसमस’’ कहा जाता है। बर्फ से सजी सफेद चमकदार प्रकृति क्रिसमस के उल्लास को और अधिक मनमोहक, शांत एवं आध्यात्मिक बना देती है। व्हाइट क्रिसमस का शाब्दिक अर्थ है – ‘‘सफेद क्रिसमस’’ यानि ऐसा क्रिसमस जब वातावरण बर्फ से सजा हुआ रहता है। यह अवधारणा मुख्य रूप से उन पश्चिमी देशों से जुड़ी है, जहाँ दिसंबर का महीना कड़ाके की ठंड और बर्फबारी लेकर आता है। सफेद बर्फ को पवित्रता, शांति एवं नये शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है, जो प्रभु यीशु के उपदेशों में बताया जाता है। इसी कारण व्हाइट क्रिसमस को एक आदर्श और स्वप्निल क्रिसमस के रूप में देखा जाता है।
ऐतिहासिक रूप से देखा जाय तो बाइबिल में यीशू के जन्म के समय बर्फबारी का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। फिर भी यूरोपीय देशों की सर्द जलवायु ने क्रिसमस को बर्फ से जोड़ दिया। मध्यकालीन यूरोप में क्रिसमस पर्व के समय अक्सर बर्फ गिरती थी, जिससे व्हाइट क्रिसमस की परंपरा विकसित हुई। धार्मिक दृष्टि से सफेद रंग पवित्रता, निष्कलंकता और ईश्वर के प्रकाश का प्रतीक है। इस प्रकार व्हाइट क्रिसमस केवल प्राकृतिक घटना न होकर एक आध्यात्मिक भावना का भी प्रतिनिधित्व करता है। साहित्य, कला और संगीत में व्हाइट क्रिसमस:- व्हाइट क्रिसमस की कल्पना ने साहित्य, चित्रकला और संगीत को गहराई से प्रभावित किया है। कवियों और लेखकों ने बर्फ से ढके गाँवों, गिरिजाघरों और क्रिसमस की रातों का सुंदर चित्रण किया है। विशेष रूप से एक प्रसिद्ध गीत ‘‘व्हाइट क्रिसमस’’ ने इस अवधारणा को विश्व भर में लोकप्रिय बना दिया। यह गीत घर, परिवार और बचपन की मीठी यादों को दर्शाता है, जहाँ बर्फ के बीच भी अपनापन और गर्मजोशी महसूस होती है। फिल्मों और कहानियों में भी व्हाइट क्रिसमस को एक आदर्श, सुखद और शांतिपूर्वक पर्व के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।व्हाइट क्रिसमस के दौरान लोग अपने-अपने घरों और आसपास के वातावरण को विशेष रूप से सजाते हैं। बर्फ से ढके देवदार के पेड़, रंग-बिरंगी रोशनियाँ, सितारे, घंटियाँ और मोमबत्तियाँ वातावरण को दिव्य और पवित्र बना देती है। लोग सुबह से चर्च जाकर विशेष प्रार्थनाओं में भाग लेते हैं, क्रिसमस कैरोल गाते हैं और प्रभु यीशू के जन्म की कथा सुनते हैं। परिवार और मित्र एक साथ मिलकर यह पर्व मनाते हैं, भोजन करते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं। बर्फ में खेलना, स्नोमेन बनाना, स्केटिंग करना और आग तापना यह व्हाइट क्रिसमस का अभिन्न हिस्सा है।व्हाइट क्रिसमस बच्चों के लिए किसी परीकथा से कम नहीं होता। वे सांता क्लॉज के आने की कल्पना करते हैं, जो बर्फीली रात में अपने स्लेज पर सवार होकर उपहार बाँटते हैं। बच्चों की हँसी, उत्साह और बर्फ में खेलते हुए खुशी इस पर्व को जीवंत बना देती है। युवाओं के लिए भी यह समय आनंद, मित्रता और उत्सव का होता है, जब वे संगीत, सजावट और सामूहिक उत्साह में भाग लेते हैं। भारत एक ट्रॉपिकल, उष्णकटिबंधीय देश है, इसलिए यहाँ अधिकांश क्षेत्रों में क्रिसमस के समय बर्फबारी नहीं होती। फिर भी क्रिसमस पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिमालयी क्षेत्रों में, जैसे कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में प्राकृतिक रूप से बर्फ गिरने से, व्हाइट क्रिसमस देखने को मिलता है। देश के अन्य भागों में लोग कृत्रिम बर्फ, सजावटी थीम, कपास और सफेद सजावट के माध्यम से व्हाइट क्रिसमस का अनुभव करते हैं। यह दर्शाता है कि व्हाइट क्रिसमस केवल मौसम पर निर्भर नहीं है, बल्कि भावना और उत्सव पर आधारित है। पर्यटन स्थलों पर लोग बर्फीले क्षेत्रों में जाकर क्रिसमस मनाना पसंद करते हैं। सोशलमीडिया, फिल्मों और विज्ञापनों ने भी व्हाइट क्रिसमस की छवि को और मजबूत किया है। क्रिसमस का पर्व हमें शांति, पवित्रता एवं प्रेम का संदेश देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि ठंड और कठिन परिस्थितियों में भी मानवीय गर्मजोशी, करुणा और भाईचारा, जीवन को सुंदर बना सकते हैं। यह पर्व जरूरतमंदों की मदद करने, रिश्तों को मजबूत करने एवं आंतरिक शुद्धता अपनाने की प्रेरणा देता है। व्हाइट क्रिसमस प्रकृति की सुंदरता और आध्यात्मिक भावना का अद्वितीय संगम है। बर्फ की सफेदी में लिपटा यह पर्व मन को शांति और हृदय को प्रेम से भर देता है। चाहे वास्तविक बर्फ गिरे या केवल कल्पना में हो, व्हाइट क्रिसमस का वास्तविक अर्थ है – स्वच्छ मन, प्रेमपूर्ण हृदय और एक-दूसरे के प्रति सद्भावना। यही इस पर्व की सच्ची और स्थायी सुंदरता है। डॉ. नीलिमा पिम्पलापुरे लेखिका, शिक्षाविद, समाजसेविका, सागर

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