
🚨 सहारनपुर में अवैध खनन का कहर: बरथाकास्थ पठेड़ गांव में दिन-रात दौड़ती ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, टूटी सड़कें–फूटी पाइपलाइनें, ग्रामीणों का जीवन बेहाल 🚨
सहारनपुर, 27 जनवरी 2026। जनपद सहारनपुर के थाना चिलकाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बरथाकास्थ पठेड़ इन दिनों अवैध खनन की गतिविधियों के कारण गंभीर संकट से गुजर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के अंदर से रेत, बजरी और कोर्सेट से लदी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन-रात बेखौफ गुजर रही हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है और ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा।
ग्रामीणों के अनुसार, इन भारी वाहनों की तेज रफ्तार आवाजाही ने गांव की बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गांव की सड़कें जगह-जगह से उखड़ चुकी हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बरसात या नाली का पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
💧 पानी की पाइपलाइनें फूटी, नालियां टूटी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि भारी ट्रॉलियों के दबाव से भूमिगत पानी की पाइपलाइनें फूट चुकी हैं, जिससे पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। कई घरों में पानी की समस्या खड़ी हो गई है। इसके अलावा गांव की नालियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
एक ग्रामीण ने बताया, “दिन हो या रात, बिना नंबर या ओवरलोड ट्रॉलियां लगातार निकलती रहती हैं। घरों की दीवारों तक में कंपन महसूस होता है। कई बार बच्चों को सड़क पार कराना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।”
⚠️ हादसों का खतरा बढ़ा
गांव के अंदर संकरी गलियों से भारी वाहन गुजरने के कारण हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ट्रॉलियां अचानक मोड़ पर तेज गति से आ जाती हैं, जिससे बाइक सवार और पैदल लोग बाल-बाल बचते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों में भी डर का माहौल है।
❓ कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि अवैध खनन और ओवरलोडिंग की गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं, तो संबंधित विभागों द्वारा सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं, जिससे लोगों में प्रशासनिक उदासीनता को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। हालांकि इस संबंध में अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
🌾 खेती और पर्यावरण पर भी असर
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार धूल उड़ने से फसलें प्रभावित हो रही हैं। खेतों के पास से गुजरती ट्रॉलियों से मिट्टी और धूल की मोटी परत जम रही है, जिससे खेती को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा खनन के कारण भू-संतुलन बिगड़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
🗣️ ग्रामीणों की मांग
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- गांव के अंदर से भारी वाहनों का आवागमन तत्काल रोका जाए
- अवैध खनन की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
- टूटी सड़कों और पाइपलाइन की मरम्मत कराई जाए
- ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे।
फिलहाल बरथाकास्थ पठेड़ गांव के लोग इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेगा और अवैध खनन के इस कथित खेल पर रोक लगाएगा, ताकि गांव की शांति और सामान्य जीवन फिर से बहाल हो सके।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो चीफ – हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर
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