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टोल प्लाजा के नाम पर गुंडागर्दी? अधिवक्ता आरती पाण्डेय से मारपीट, अवनीश दुबे गंभीर घायल

मारकुंडी टोल प्लाजा, सोनभद्र का मामला गरमाया

🚨 टोल प्लाजा के नाम पर गुंडागर्दी? अधिवक्ता आरती पाण्डेय से मारपीट, अवनीश दुबे गंभीर घायल — मारकुंडी टोल प्लाजा, सोनभद्र का मामला गरमाया 🚨

सोनभद्र जनपद के मारकुंडी टोल प्लाजा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने टोल संचालन की व्यवस्था और वहां तैनात कर्मचारियों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि टोल पर मौजूद कथित दबंग कर्मियों द्वारा अधिवक्ता आरती पाण्डेय के साथ अभद्रता और मारपीट की गई, जिसमें उनके साथ मौजूद अवनीश दुबे को गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है और टोल प्लाजा पर काम कर रहे लोगों के व्यवहार को लेकर जनचर्चा तेज हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी बात को लेकर टोल शुल्क भुगतान के दौरान विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते बढ़ गया। आरोप है कि टोल पर मौजूद कुछ कर्मचारियों ने कानून हाथ में लेते हुए जबरन बदसलूकी की। अधिवक्ता के साथ कथित हाथापाई की गई और बीच-बचाव में आए अवनीश दुबे को गंभीर रूप से चोटिल कर दिया गया। घायल को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत को लेकर चिंता जताई जा रही है।

यह घटना सिर्फ एक झगड़े का मामला नहीं, बल्कि बड़े सवाल खड़े करती है —
👉 क्या टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों को कानून से ऊपर समझा जा रहा है?
👉 क्या टोल प्रबंधन द्वारा ऐसे लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है जो आम नागरिकों से दबंगई करते हैं?
👉 क्या वहां सुरक्षा व्यवस्था और व्यवहार संबंधी कोई निगरानी तंत्र मौजूद है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल प्लाजा पर अक्सर वाहन चालकों से बहस, दबाव और दुर्व्यवहार की शिकायतें सुनने को मिलती रहती हैं, लेकिन इस बार मामला एक अधिवक्ता से जुड़ा होने के कारण ज्यादा तूल पकड़ गया है। यदि अधिवक्ता के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी — यह सवाल अब खुलकर पूछा जा रहा है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि टोल प्लाजा निजी प्रबंधन के अधीन हो सकते हैं, लेकिन वहां काम करने वाला कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं होता। किसी भी प्रकार की मारपीट, अभद्रता या जबरन वसूली दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसे मामलों में संबंधित थाना पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई अपेक्षित है।

अब निगाहें प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या आरोपों की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी? क्या टोल प्लाजा संचालन की समीक्षा होगी? क्या घायल पक्ष को न्याय मिलेगा? ये वे सवाल हैं जिनका जवाब समाज मांग रहा है।

मामला संवेदनशील है और निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी, लेकिन घटना ने टोल प्लाजा की व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ | 
📞 खबर, विज्ञापन और सूचना हेतु संपर्क: 8217554083

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