।। महराजगंज बरदही में ‘गोलू’ का तांडव: युवाओं की रगों में घोला जा रहा जहर, प्रशासन मौन।।
।। कप्तानगंज का 'नशा जंक्शन': लाखों की हिस्सेदारी में बिकी वर्दी? उठ रहे हैं सुलगते सवाल।।
🚨 कप्तानगंज में ‘सफेदपोश’ मौत का कारोबार, खाकी की खामोशी पर उठते सुलगते सवाल🚨
अजीत मिश्रा (खोजी), बस्ती
बस्ती। जिले का कप्तानगंज थाना क्षेत्र इन दिनों अपराध की नई इबारत लिख रहा है। कहने को तो पुलिस महकमा ‘अपराध मुक्त समाज’ का दावा करता है, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके उलट है। कप्तानगंज थाना क्षेत्र वर्तमान में नशे का सबसे सुरक्षित अड्डा बन चुका है। यहाँ गांजे का अवैध कारोबार इस कदर चरम पर है कि अब गलियों से लेकर चौराहों तक इसकी महक आम हो गई है। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि इस जहर की खेती और बिक्री पुलिस की नाक के नीचे, और चर्चाओं की मानें तो, उनके ‘संरक्षण’ में फल-फूल रही है।
‘गोलू’ का साम्राज्य और पुलिस की मेहरबानी
क्षेत्र में चर्चा है कि महराजगंज बरदही बाजार के पास ‘गोलू’ नामक युवक खुलेआम नशे का सौदा कर रहा है। बिना किसी डर और कानून के खौफ के, यह सौदागर युवाओं की रगों में जहर घोलने का काम कर रहा है। आखिर इस ‘गोलू’ को किसका वरदहस्त प्राप्त है? क्या स्थानीय पुलिस की मुखबिरी इतनी कमजोर है कि उसे इस खुले खेल की खबर नहीं, या फिर ‘साहब’ की मेज तक पहुंचने वाले नोटों की चमक ने उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी है?
कप्तानगंज चौराहा: नशे का नया ‘हब’
इतना ही नहीं, कप्तानगंज चौराहा जो कभी क्षेत्र की व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र था, अब नशेड़ियों और अवैध कारोबारियों का अड्डा बन चुका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की रहनुमाई में यह धंधा दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की कर रहा है। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में हों और लाखों की अवैध कमाई में हिस्सेदार बन जाएं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
बर्बाद होती पीढ़ी, सुलगता आक्रोश
नशे के इस मकड़जाल में क्षेत्र की युवा पीढ़ी तेजी से फंसती जा रही है। घर के चिराग बुझ रहे हैं, परिवार तबाह हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। जनता के बीच भारी आक्रोश व्याप्त है, लेकिन अवैध कारोबारियों और उनके ‘वर्दीधारी’ आकाओं के खौफ से लोग खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।
बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान इस मामले में संज्ञान लेंगे? क्या कप्तानगंज की पुलिस पर लगे इन गंभीर आरोपों की जांच होगी, या फिर नशे का यह जानलेवा खेल यूं ही चलता रहेगा और जिम्मेदार अपनी जेबें भरते रहेंगे?
जनता अब जवाब चाहती है।








