अजीत मिश्रा (खोजी)
कुशीनगर में स्वास्थ्य सेवा का ‘दुकानदार’ मॉडल: क्या मरीजों की जान सिर्फ आंकड़ों का खेल है?
उत्तर प्रदेश।
कुशीनगर।। जिले के स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को जो कार्रवाई की, वह महज औपचारिकता है या व्यवस्था के चेहरे पर लगा तमाचा? जब स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने छापेमारी की तो कुशीनगर में कुकुरमुत्तों की तरह उगे फर्जी अस्पतालों का स्याह सच सामने आ गया। एक ही दिन में 6 अस्पतालों का सील होना और 11 को नोटिस थमाया जाना यह साबित करता है कि शहर में ‘इलाज’ के नाम पर मौत का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था।
💫साख पर सवाल, जवाब कौन देगा?
सवाल यह नहीं है कि कितने अस्पताल सील हुए, बल्कि सवाल यह है कि ये अस्पताल अब तक चल कैसे रहे थे? जिस प्रज्ञा हॉस्पिटल, जीवन ज्योति या लाइफ लाइन जैसे केंद्रों को आज ‘अवैध’ और ‘मानक विहीन’ घोषित किया जा रहा है, क्या कल तक वहां मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं हो रहा था? क्या विभाग को तब तक होश नहीं आया जब तक मरीजों की सुरक्षा दांव पर नहीं लग गई?
💫नोटिस का खेल, सुधरेगी कब व्यवस्था?
जिन 11 अस्पतालों को नोटिस थमाया गया है, क्या वे केवल कागजी खानापूर्ति है? अक्सर देखा गया है कि नोटिस मिलने के बाद अस्पताल संचालक या तो कुछ दिन के लिए शटर गिरा देते हैं या फिर ‘जुगाड़’ और ‘सेटिंग’ के जरिए दोबारा उसी ढर्रे पर काम शुरू कर देते हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग इस बात की गारंटी दे सकता है कि इन अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए उन्होंने कोई पुख्ता इंतजाम किया है?
💫जनता की जान है या खिलौना?
बिना पंजीकरण और बिना किसी मानक के चल रहे ऑपरेशन थिएटर मौत के अड्डे हैं। कप्तानगंज में ऑपरेशन थिएटर मानक विहीन पाए जाना सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही है। स्वास्थ्य विभाग का यह दावा कि “आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी”, लोगों को सांत्वना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का अहसास कराता है।
अवैध अस्पतालों का फलना-फूलना कहीं न कहीं उस मिलीभगत की ओर इशारा करता है जिसे प्रशासन अक्सर नजरअंदाज कर देता है। कुशीनगर की जनता अब केवल ‘सीलिंग’ की खबर नहीं, बल्कि उन रसूखदारों के नाम जानना चाहती है जिनकी छत्रछाया में यह ‘मौत का कारोबार’ फलता-फूलता रहा।
💫मानक विहीन मौत के अड्डे
एक ही दिन में 6 अस्पतालों का सील होना और 11 को नोटिस थमाना कोई ‘बड़ी कार्रवाई’ नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की अपनी नाकामी का इकरारनामा है। सवाल यह है कि ये अवैध अस्पताल कल तक कैसे फल-फूल रहे थे? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बँधी थी? जब ऑपरेशन थिएटरों में मानकों की सरेआम धज्जियाँ उड़ रही थीं, तब विभाग के इंस्पेक्टर कहाँ थे?
💫नोटिस का ‘कमीशन’ खेल
जिन 11 अस्पतालों को नोटिस थमाया गया है, क्या वे केवल समय काटने का जरिया हैं? जनता जानती है कि नोटिस का मतलब अक्सर ‘सेटिंग’ की शुरुआत होता है। आज जो अस्पताल सील हुआ है, कल वही किसी दूसरे नाम या ‘दबाव’ के चलते फिर खुल जाएगा। जब तक इन अस्पतालों के संचालकों पर Criminal Case दर्ज नहीं होता और उनकी संपत्तियां कुर्क नहीं होतीं, तब तक यह सीलिंग सिर्फ एक ‘नाटक’ है।
💫जिम्मेदार कौन?
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ छापेमारी करना नहीं, बल्कि अवैध रूप से चल रहे इन ‘मौत के अड्डों’ को पनपने ही न देना है।
💫कुशीनगर की जनता पूछ रही है:
👉सांठगांठ का खुलासा: क्या बिना स्थानीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा संभव था?
👉मरीजों का भविष्य: सील हुए अस्पतालों में भर्ती मरीजों के साथ हुए खिलवाड़ की जिम्मेदारी कौन लेगा?
💫स्थायी समाधान: कब तक जनता की जान के साथ यह ‘जुगाड़ का इलाज’ चलता रहेगा? स्वास्थ्य विभाग का “अभियान जारी रहेगा” का रटा-रटाया बयान अब जनता को नहीं बहला सकता। अगर सच में व्यवस्था सुधारनी है, तो विभाग को फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर सख्त दिखना होगा। अन्यथा, अगली बार किसी मासूम की जान जाने पर, यह विभाग खुद कठघरे में खड़ा होगा।
अखबार के लिए तीखा लेख
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने साफ किया कि बिना मानक पूरे किए अस्पताल चलाने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। जिन अस्पतालों में कमियां मिली हैं, उन्हें निर्धारित समय के भीतर मानक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कसया प्रतिनिधि के अनुसार, सीएचसी अधीक्षक मार्कण्डेय चतुर्वेदी ने प्रज्ञा हॉस्पिटल, अमन पैथोलॉजी और जीवन ज्योति मेडिकेयर को वैध कागजात के अभाव में सील कर दिया। वहीं दीनदयाल अस्पताल, शारदा हॉस्पिटल और नव जीवन मैक्स हॉस्पिटल को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
तमकुहीराज प्रतिनिधि के अनुसार, सीएचसी अधीक्षक डॉ. हिमांशु कुमार ने लखीबाग में संचालित लाइफ लाइन हॉस्पिटल को वैध प्रमाणपत्र न होने के कारण सील कर दिया। वहीं लवली हॉस्पिटल जांच के दौरान बंद मिला। इसके अलावा अभिराज हॉस्पिटल, नंद बाल गोपाल हॉस्पिटल और ओम साईं हॉस्पिटल में कमियां मिलने पर नोटिस जारी किया गया।
नेबुआ नौरंगिया प्रतिनिधि के अनुसार, सीएमओ डॉ. चंद प्रकाश ने अपना हॉस्पिटल, सेवा हॉस्पिटल, साईं हॉस्पिटल और मां दुर्गा अस्पताल की जांच की। जांच में मां दुर्गा अस्पताल मानक विहीन पाए जाने पर उसे सील कर दिया गया।
मथौली प्रतिनिधि के अनुसार, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार मद्धेशिया ने सिटी हॉस्पिटल मथौली से पंजीकरण होने तक अस्पताल का संचालन न करने का शपथ पत्र लिया। वहीं शिवम हॉस्पिटल जांच के दौरान बंद मिला। इसके अलावा स्टार हॉस्पिटल का भी निरीक्षण किया गया।
कप्तानगंज प्रतिनिधि के अनुसार, एसडीएम विनोद कुमार गुप्ता और सीएचसी अधीक्षक ने तिरुपति हॉस्पिटल, सरोज हॉस्पिटल और ज्ञानती मेमोरियल हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर को मानक विहीन पाए जाने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
दुदही प्रतिनिधि के अनुसार, डॉ. अनूप कुमार ने बिना पंजीकरण संचालित एसएन हॉस्पिटल दशहवा को सील कर दिया, जबकि राहत हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया। इसके अलावा शिवम हॉस्पिटल, महंत शिवनंदन हॉस्पिटल बड़हरा, मंगलम हॉस्पिटल, आयुषी हॉस्पिटल, न्यू शिवाय हॉस्पिटल, विंध्यवासिनी हॉस्पिटल दुदही, सरस्वती हॉस्पिटल गौरी श्रीराम और देवानसी हॉस्पिटल तिवारी पट्टी का भी निरीक्षण किया गया।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में अवैध रूप से अस्पताल संचालित करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
क्या कार्रवाई केवल दिखावा है या सच में स्वास्थ्य व्यवस्था को शुद्ध करने का कोई इरादा है? जवाब केवल छापेमारी से नहीं, दोषियों पर सख्त कानूनी नजीर पेश करने से मिलेगा।









