

मैहर
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला* ने मैहर सिविल अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। वर्षों से बंद पड़ी लिफ्ट, ठप ऑक्सीजन प्लांट और डॉक्टरों के खाली पद—इन सब पर उपमुख्यमंत्री ने सख्त नाराजगी जताते हुए साफ शब्दों में कहा कि “जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
निरीक्षण के दौरान मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, *सांसद प्रतिनिधि संतोष सोनी*, समिति सदस्य सचिन मिश्रा,जिला कलेक्टर रानी बाटड, एसडीएम दिव्या पाठक, अस्पताल प्रभारी आर एन पाण्डेय सहित प्रशासनिक अमला और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
डॉक्टरों की कमी पर फटकार
अस्पताल में लंबे समय से खाली पड़े डॉक्टरों के अतिरिक्त पदों को लेकर उपमुख्यमंत्री ने तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर पद स्वीकृत हैं तो भर्ती में देरी क्यों? मरीजों को इलाज के लिए भटकना क्यों पड़े?
एक हफ्ते में लिफ्ट नहीं चली तो जिम्मेदारी तय होगी
इमरजेंसी के लिए लगी लिफ्ट वर्षों से बंद पड़ी है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारी को फोन पर ही सख्त निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर लिफ्ट चालू होनी चाहिए, वरना जवाबदेही तय की जाएगी।
दो दिन में ऑक्सीजन प्लांट शुरू करने का आदेश
दो-दो ऑक्सीजन प्लांट होने के बावजूद मरीजों को किराए की ऑक्सीजन पर निर्भर रहना पड़ रहा था। इस पर उपमुख्यमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्लांट की तकनीकी कमियां तुरंत दूर कर दो दिन में सप्लाई नियमित की जाए।
अब प्रशासन की परीक्षा
राजनीतिक गलियारों में यह निरीक्षण चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि क्या अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारी तय समयसीमा में व्यवस्थाएं दुरुस्त कर पाएंगे, या फिर यह भी केवल निरीक्षण तक सीमित रह जाएगा?
मैहर की जनता अब इंतजार में है—क्या सच में बदलेगी सिविल अस्पताल की तस्वीर, या फिर आदेश फाइलों में ही दबकर रह जाएंगे?
मैहर ब्यूरो चीफ सुरेन्द्र कुमार शर्मा
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