
बालोतरा। एक तरफ जहां सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया’ के नारे बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के मंदिरों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो प्रशासन और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मामला बालोतरा के गांधीपुरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संख्या 4 का है, जहाँ शनिवार को नन्हे-मुन्ने बच्चों के हाथों में कलम की जगह कुल्हाड़ी और झाड़ू थमा दिए गए।
लापरवाही की हद: परीक्षा के समय बच्चों से कटवाए पेड़
हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। यह वह समय है जब शिक्षकों को विद्यार्थियों की शंकाओं को दूर करना चाहिए और उन्हें परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए। लेकिन गांधीपुरा स्कूल में नजारा इसके बिल्कुल उलट था।
खतरनाक काम: स्कूल परिसर में मासूम बच्चों से नीम के पेड़ की टहनियां कटवाई गईं।
सफाई का बोझ: छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में बड़े झाड़ू थमाकर उनसे मैदान साफ करवाया गया।
सुरक्षा पर सवाल: पेड़ काटने जैसे जोखिम भरे काम में बच्चों का इस्तेमाल करना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है।
क्या यह विद्या का भवन है या कामगारों का अड्डा?
अभिभावकों और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए भेजते हैं, न कि मजदूरी करने के लिए।
“शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों को बेहतर भविष्य देना है, लेकिन यहाँ तो उनसे विद्यालय का रखरखाव करवाया जा रहा है। अगर पेड़ काटते समय किसी बच्चे को चोट लग जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?” — एक चिंतित अभिभावक
प्रशासन की चुप्पी और बढ़ता खतरा
स्कूल प्रशासन की यह लापरवाही बच्चों की जान जोखिम में डाल सकती है। बोर्ड परीक्षाओं के तनावपूर्ण माहौल में बच्चों से इस तरह का शारीरिक श्रम करवाना उनके मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई पर भी बुरा असर डालता है।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और दोषी शिक्षकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। क्या इन “नौनिहालों” को वापस उनकी किताबें मिलेंगी या फिर ये इसी तरह विद्यालय की अव्यवस्थाओं की बलि चढ़ते रहेंगे?
नितिन वैष्णव,बालोतरा,राजस्थान





