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खनन विभाग के ‘आशीर्वाद’ से छलनी हो रहा बस्ती का सीना; डीएम-एसडीएम की चुप्पी पर उठे सवाल।

बस्ती में खाकी और खादी के संरक्षण में 'मिट्टी' का खेल: परसरामपुर से दुबौलिया तक माफिया का साम्राज्य!

अजीत मिश्रा (खोजी)

⚓प्रशासनिक शह या लाचारी? परसरामपुर में खनन माफिया के आगे नतमस्तक हुआ विभाग⚓

  • नतमस्तक सिस्टम, बेखौफ माफिया: लालगंज, मुंडेरवा और कलवारी में कानून को ठेंगा दिखा रही जेसीबी!
  • सरकारी फाइलों में ‘जीरो टॉलरेंस’, धरातल पर माफिया का ‘फुल लाइसेंस’; आखिर कब जागेगा प्रशासन?
  • ग्राउंड रिपोर्ट: अशोकपुर बना अवैध खनन का केंद्र, टिनिच और गणेशपुर में भी जारी है पीली मिट्टी की लूट।
  • बस्ती मंडल विशेष: खनन माफियाओं के आगे बौना साबित हुआ प्रशासन, रातों-रात बेची जा रही जिले की विरासत।
  • सत्ता की हनक या अधिकारियों की मिलीभगत? कलवारी और दुबौलिया में बेरोकटोक जारी है अवैध खनन।
  • माफिया राज: बस्ती के सात थाना क्षेत्रों में सिस्टम फेल, माफिया बेलगाम!
  • अंधेर नगरी: अधिकारियों को खबर, फिर भी माफियाओं पर मेहरबान प्रशासन।
  • खनन का ‘सिंडिकेट’: परसरामपुर से लेकर लालगंज तक फैला भ्रष्टाचार का जाल।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

बस्ती। जनपद के परसरामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत अशोकपुर में इन दिनों कानून की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। अवैध मिट्टी खनन का काला कारोबार इस कदर हावी है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे खनन विभाग ने माफियाओं के सामने आत्मसमर्पण कर दिया हो। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह खेल “ऊपर” के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है।

⚓दिन-रात जारी है ‘पीली मिट्टी’ की लूट

अशोकपुर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन का जाल बिछ चुका है। जेसीबी मशीनें दिन-रात धरती का सीना चीर रही हैं और दर्जनों डंपर बिना किसी रोक-टोक के अवैध मिट्टी की ढुलाई कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम हो रहा है, लेकिन संबंधित विभाग की आँखों पर पट्टी बंधी हुई है।

जनपद के ग्रामीण अंचलों में खनन माफियाओं ने अपनी जड़ें इतनी गहरी जमा ली हैं कि अब उन्हें कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है। परसरामपुर के अशोकपुर से शुरू हुआ अवैध खनन का यह ‘खूनी खेल’ अब लालगंज, मुंडेरवा, गणेशपुर, टिनिच, कलवारी और दुबौलिया जैसे क्षेत्रों को भी अपने आगोश में ले चुका है। विडंबना देखिए कि विभाग ‘आंखें मूंदे’ बैठा है और माफिया धरती का सीना छलनी कर रहे हैं।

⚓इन क्षेत्रों में माफियाओं का नंगा नाच

बस्ती के अलग-अलग कोनों से आ रही खबरें डराने वाली हैं। माफियाओं ने पूरे जिले को अलग-अलग ‘जोन’ में बांट रखा है:

  • परसरामपुर व गणेशपुर: यहाँ दिन-रात जेसीबी मशीनों का शोर गूंज रहा है।
  • मुंडेरवा व लालगंज: चीनी मिल और औद्योगिक बेल्ट होने के बावजूद यहाँ के खेतों को अवैध खनन की भेंट चढ़ाया जा रहा है।
  • टिनिच व कलवारी: सरयू के कछार और ग्रामीण रास्तों पर डंपरों की रफ्तार ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
  • दुबौलिया: यहाँ भी अवैध मिट्टी की खुदाई का धंधा चरम पर है, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लग रहा है।

⚓खनन विभाग की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी

हैरानी की बात यह है कि बस्ती डीएम, एसडीएम और खनन अधिकारी को इन सभी क्षेत्रों की वस्तुस्थिति से बार-बार अवगत कराया गया है। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलों में पन्ने पलटे जा रहे हैं। जनता अब खुलकर पूछ रही है— “क्या खनन विभाग ने माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं या फिर इस अवैध धंधे का हिस्सा उनके दफ्तरों तक भी पहुँच रहा है?”Screenshot 20260412 102950 20260412 102933

⚓अधिकारियों का वही पुराना ‘रटा-रटाया’ जवाब

जब परसरामपुर थाना प्रभारी से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने आश्वासन दिया कि “कड़ी कार्रवाई होगी।” लेकिन सवाल यह है कि यह ‘कड़ी कार्रवाई’ कब होगी? क्या तब, जब इन क्षेत्रों की उपजाऊ मिट्टी पूरी तरह खत्म हो जाएगी या जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा?

“प्रशासन की संलिप्तता का सबसे बड़ा सबूत यह है कि शिकायत के बावजूद न तो डंपर सीज किए जा रहे हैं और न ही माफियाओं पर एफआईआर दर्ज हो रही है।” > — स्थानीय निवासी (कलवारी-दुबौलिया क्षेत्र)

🔥सुलगते सवाल

  • लालगंज से टिनिच तक दौड़ रहे अवैध डंपरों को पुलिस का डर क्यों नहीं है?
  • गणेशपुर और मुंडेरवा में होने वाले खनन का हिसाब खनन विभाग के पास क्यों नहीं है?
  • क्या प्रशासन वास्तव में इतना लाचार है कि वह मुट्ठी भर माफियाओं पर लगाम नहीं लगा सकता?

बस्ती मंडल की यह रिपोर्ट शासन के उस दावे की हवा निकाल रही है जिसमें माफियाओं को ‘पाताल’ भेजने की बात कही जाती है। यहाँ तो माफिया पाताल खोदकर मिट्टी बेच रहे हैं और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है। बस्ती की हर खबर पर हमारी पैनी नजर। साझा करें ताकि जवाबदेही तय हो सके।

⚓प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू जिला प्रशासन का रवैया है। सूत्रों के अनुसार:

जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) और खनन अधिकारी को इस अवैध कारोबार की लिखित व मौखिक सूचना दी जा चुकी है।बावजूद इसके, धरातल पर किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई का न होना प्रशासन की मौन संलिप्तता की ओर इशारा करता है।आखिर क्या कारण है कि शिकायतों के बाद भी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं? क्या शासन के सख्त निर्देशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है?

“अवैध खनन की सूचना संज्ञान में है। मामले की जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” > — थाना प्रभारी, परसरामपुर

✍️जांच का विषय: ‘आशीर्वाद’ या भ्रष्टाचार?

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी पुलिस या विभाग को सूचना दी जाती है, तो कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। अशोकपुर में चल रहा यह खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी चपत लगा रहा है।

🧭मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:

  • बिना परमिट के इतनी बड़ी मात्रा में मिट्टी का उठान कैसे संभव है?
  • खनन अधिकारियों की टीम ने अब तक मौके का निरीक्षण क्यों नहीं किया?
  • माफियाओं को विभाग की ‘छापेमारी’ की सूचना पहले ही कैसे मिल जाती है?

निष्कर्ष: परसरामपुर का यह मामला योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को चुनौती दे रहा है। यदि जल्द ही उच्चाधिकारियों ने इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया, तो माफियाओं के साथ-साथ प्रशासन की छवि पर भी कालिख पुतना तय है।

बस्ती की खबरों के लिए बने रहें हमारे साथ।

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