
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: ममता का गला घोंटता सिस्टम! प्रसव के दौरान नवजात का सिर धड़ से अलग, इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- बस्ती में ‘मेडिकल मर्डर’: गर्भ में ही रह गया नवजात का सिर, क्या यही है प्रदेश की हाईटेक स्वास्थ्य सेवा?
- साहब! मेरी बहू का बच्चा काट डाला… एसपी की चौखट पर न्याय की गुहार लगाता बेबस परिवार।
- सीओ कलवारी का गैर-जिम्मेदाराना बयान— ‘जांच रिपोर्ट का इंतज़ार है’, तब तक क्या कातिल खुले घूमेंगे?
- निजी अस्पतालों से सांठगांठ और सरकारी सिस्टम की लापरवाही ने ली एक मासूम की जान।
- नर्स पर मेहरबान स्वास्थ्य विभाग: सेवा समाप्ति की सिफारिश के बीच टीवी अस्पताल में ‘सेफ लैंडिंग’।
बस्ती। जनपद के कुदरहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि ‘धरती के भगवान’ कहे जाने वाले सफेदपोशों के चेहरे से नकाब भी उतार दिया है। एक स्टाफ नर्स की कथित ‘जबरदस्ती’ और घोर लापरवाही ने एक मां की कोख सूनी कर दी। मामला इतना वीभत्स है कि सुनने वालों की रूह कांप जाए—प्रसव के दौरान नवजात का सिर धड़ से अलग होकर गर्भ में ही रह गया!
लापरवाही की इंतहा: नर्स की ‘अनाड़ी’ जिद ने ली जान
पीड़ित परिवार के मुताबिक, सात माह की गर्भवती प्रेमा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर कुदरहा सीएचसी लाया गया था। आरोप है कि वहां तैनात स्टाफ नर्स कुसुम ने बिना किसी डॉक्टर की मौजूदगी या विशेषज्ञता के, जबरन नॉर्मल डिलीवरी कराने की कोशिश की। इस ‘पहलवानी’ का नतीजा यह हुआ कि नवजात का शरीर तो बाहर आ गया, लेकिन सिर अंदर ही फंसकर अलग हो गया।
हैरत की बात यह है कि जब मामला बिगड़ा, तो नर्स ने अपनी खाल बचाने के लिए पीड़िता को गुपचुप तरीके से एक निजी अस्पताल (मैक्स हॉस्पिटल) में शिफ्ट कर दिया और रेफर पर्ची तक देने से कतराती रही। अंत में मेडिकल कॉलेज कैली में ऑपरेशन के जरिए मृत नवजात के सिर को बाहर निकाला गया।
सत्ता और सिस्टम की ‘सुस्त’ चाल
घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की है। पीड़ित पिता दुर्गा प्रसाद न्याय की गुहार लेकर एसपी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जवाब में सिर्फ ‘जांच का आश्वासन’ मिल रहा है। कलवारी सीओ संजय सिंह का बयान कि “सीएमओ की रिपोर्ट के बिना पुलिस कुछ नहीं कर सकती”, इस बात का प्रमाण है कि सरकारी महकमे एक-दूसरे के पीछे छिपकर दोषियों को बचाने का सेफ पैसेज दे रहे हैं।
कागजी कार्रवाई या महकमे का बचाव?
हालांकि, जिला स्वास्थ्य समिति ने उक्त नर्स की सेवा समाप्ति की संस्तुति की है और उसे फिलहाल टीवी अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि:
- क्या सिर्फ ट्रांसफर या सेवा समाप्ति एक अजन्मे बच्चे की ‘हत्या’ का प्रायश्चित है?
- बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के सीएचसी में ऐसे जटिल प्रसव का जोखिम क्यों लिया गया?
- मैक्स हॉस्पिटल जैसे निजी सेंटरों के साथ सरकारी कर्मियों का क्या ‘कमीशन का खेल’ चल रहा है?
ब्यूरो की टिप्पणी: बस्ती का स्वास्थ्य विभाग अब मौतों का केंद्र बनता जा रहा है। कुदरहा की यह घटना कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि ‘मेडिकल मर्डर’ की श्रेणी में आती है। अगर शासन ने तत्काल दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा, तो जनता का इस सिस्टम से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। क्या शासन के रसूखदार अधिकारी अब भी कागजी जांच की फाइलों में ही दबे रहेंगे या पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलेगा?



















