

मिशन 5642 फेज 1 : अन्नपूर्णा बेस कैंप पर “कर्मयोगियों” की ऐतिहासिक सफलता
जीईजी ग्लोबल फाउंडेशन के नेतृत्व में आयोजित मिशन 5642 – फेज 1 ने अन्नपूर्णा बेस कैंप (4,130 मीटर) पर सफलतापूर्वक अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। 12 मई 2026 को टीम ने इस ऊँचाई तक पहुँचकर न केवल भारत का तिरंगा लहराया, बल्कि युवाशक्ति, सेवा, संस्कृति और संकल्प का संदेश भी पूरी दुनिया तक पहुँचाया।
जीईजी के बिहार स्टेट प्रेसिडेंट शिवम कुमार ने बताया कि यह केवल एक साधारण ट्रेक नहीं था, बल्कि यह उन युवा “कर्मयोगियों” की प्रेरणादायक यात्रा थी, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी साहस, अनुशासन और समर्पण का अद्भुत परिचय दिया। इस मिशन में भारत के विभिन्न राज्यों से कुल पाँच सदस्य शामिल हुए, जिनमें तीन सदस्य असम से थे।
इस अभियान का नेतृत्व सैयम मजूमदार ने किया, जो प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित हैं तथा संस्था के अध्यक्ष हैं। उनके साथ निखिल दासगुप्ता और अनुभव पॉल ने असम की समृद्ध संस्कृति, भारत का राष्ट्रीय ध्वज तथा इंटरनेशनल वॉलंटियर्स ईयर 2026 का संदेश वैश्विक मंच तक पहुँचाया।
उत्तराखंड से आए प्रेम शर्मा ने इस अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी मेहनत, धैर्य और समर्पण ने पूरी टीम को प्रेरित किया। वहीं दिल्ली से शामिल हुए मंज़र इमाम ने भी अपने साहस और कार्यशैली से इस मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश का गौरव बढ़ाया।
कठिन पहाड़ी रास्तों, बदलते मौसम, शारीरिक थकान और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद टीम ने हार नहीं मानी। हर कदम यह साबित करता रहा कि आज का युवा यदि सही दिशा और उद्देश्य के साथ आगे बढ़े, तो वह समाज और देश के लिए परिवर्तन की नई मिसाल बन सकता है।
इस अभियान के दौरान टीम ने भारतीय तिरंगे के साथ-साथ असम की सांस्कृतिक पहचान और युवाओं के स्वैच्छिक योगदान का संदेश भी बुलंद किया। विशेष बात यह रही कि नेपाल के मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म ने भी इस मिशन को सम्मान देते हुए अपनी आधिकारिक पर्यटन ध्वज टीम को प्रदान की, जो भारत-नेपाल मैत्री और युवा सहयोग का प्रतीक बना।
मिशन 5642 अब केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन चुका है। इन युवा कर्मयोगियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि उम्र नहीं, बल्कि संकल्प, सेवा और कर्म ही किसी व्यक्ति की असली पहचान होते हैं।
कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट









