
फर्जी आधार और आपराधिक इतिहास के दम पर ‘प्रबंधक’ बनकर बैठे पिता-पुत्र, प्रशासन से जांच की मांग
मदरसे में 'अपराध' का बोलबाला: फर्जी आधार और एक दर्जन मुकदमों के आरोपी पर 'प्रबंधक' बनकर बैठने का आरोप
अजीत मिश्रा (खोजी)
फर्जी आधार से ‘प्रबंधक’ का पद हथियाने का खेल: मदरसे में धांधली पर कमिश्नर सख्त, जांच की मांग
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- शिक्षा के मंदिर में जालसाजों का डेरा: एक आधार, दो नाम और करोड़ों की काली कमाई; कमिश्नर से जांच की मांग
- बस्ती: फर्जीवाड़े के दम पर मदरसा प्रबंधक बना शातिर अपराधी, पिता-पुत्र के काले कारनामों का कच्चा-चिट्ठा खुला
- मदरसा रिजविया धांधली मामला: फर्जी दस्तावेजों से पद हथियाने वाले प्रबंधक पर होगी कार्रवाई? कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
- अपराधी पिता-पुत्र का मदरसा प्रबंधन पर कब्जा, आय से अधिक संपत्ति की जांच की उठी मांग
- बस्ती: फर्जी आधार कार्ड के जरिए उच्च न्यायालय और प्रशासन को गुमराह करने का आरोप, FIR की मांग

बस्ती/संत कबीर नगर: शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले मदरसों को अब अपराधी तत्वों ने अपनी काली कमाई और अवैध सत्ता का अड्डा बना लिया है। ताजा मामला बस्ती परिक्षेत्र के अंतर्गत मदरसा रिजविया अहले सुन्नत, रुस्तमपुर (शनिचरा बाजार) का सामने आया है, जहाँ एक व्यक्ति पर फर्जी आधार कार्ड और आपराधिक रिकॉर्ड के दम पर प्रबंधक का पद हथियाने का सनसनीखेज आरोप लगा है।शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले मदरसों की गरिमा को तार-तार करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। संत कबीर नगर के मदरसा रिजविया अहले सुन्नत, रुस्तमपुर (शनिचरा बाजार) के कार्यवाहक प्रबंधक रईस अहमद पर गंभीर आरोप लगे हैं। मदरसे के आधा दर्जन सदस्यों ने कमिश्नर बस्ती परिक्षेत्र को एक शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि आरोपी ने न केवल फर्जी आधार कार्ड बनवाकर सरकारी तंत्र को चकमा दिया है, बल्कि वह और उसका पुत्र एक शातिर अपराधी परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिन पर एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

एक आधार, दो नाम: फर्जीवाड़े का मास्टरस्ट्रैंड
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बेइली मदारपुर निवासी रईस अहमद ने बड़े शातिराना अंदाज में धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। दस्तावेजों के मुताबिक, उसने [Aadhaar Redacted] का इस्तेमाल कर दो अलग-अलग पहचानों—’रईस अहमद’ और ‘मोहम्मद हनीफ’—के नाम से आधार कार्ड बनवा रखे हैं। आरोप है कि इसी कूटरचित पहचान का सहारा लेकर वह लंबे समय से प्रशासन और माननीय उच्च न्यायालय को गुमराह करते हुए मदरसे का कार्यवाहक प्रबंधक बना बैठा है।शिकायतकर्ताओं—अब्दुल सलाम, मुनीर अहमद, मोहम्मद अली, कमालुद्दीन, हसमत अली और अब्दुल कलाम—ने कमिश्नर को दिए पत्र में खुलासा किया है कि रईस अहमद ने अपनी पहचान छुपाने के लिए एक ही आधार नंबर (719364242023) पर दो अलग-अलग नामों से आधार कार्ड बनवा रखे हैं।
प्रथम पहचान: ‘रईस अहमद’ (पिता का नाम मो. हनीफ, निवासी बेइली, मदारपुर, बस्ती)।
द्वितीय पहचान: ‘मोहम्मद हनीफ’ (पिता का नाम हनीफ खाँ, निवासी बेइली, मदारपुर, बस्ती)।
आरोप है कि इसी कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के बल पर वह मदरसे का कार्यवाहक प्रबंधक बना बैठा है और शासन-प्रशासन के साथ-साथ माननीय उच्च न्यायालय को भी गुमराह कर रहा है।
अपराध की दुनिया और रसूख का गठजोड़
मदरसे के सदस्यों—अब्दुल सलाम, मुनीर अहमद, मोहम्मद अली, कमालुद्दीन, हसमत अली और अब्दुल कलाम—ने कमिश्नर को सौंपे पत्र में पिता-पुत्र की जोड़ी के काले कारनामों का कच्चा-चिट्ठा खोल दिया है।शिकायत पत्र में रईस अहमद और उसके पुत्र इरशाद अहमद के आपराधिक रिकॉर्ड का जो विवरण दिया गया है, वह चौंकाने वाला है। इरशाद अहमद के खिलाफ अकेले 12 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
- रईस अहमद: बस्ती कोतवाली में धोखाधड़ी (धारा 419, 420, 467, 468) का मामला विचाराधीन है।
- इरशाद अहमद: उस पर धनघटा, खलीलाबाद, नगर और बस्ती कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, विद्युत अधिनियम, गुंडा एक्ट और धारा 308, 351, 352 जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं। उसे एक मामले में सजा भी हो चुकी है। धनघटा, खलीलाबाद, नगर और बस्ती कोतवाली थानों में 12 से अधिक गंभीर मुकदमे। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, विद्युत अधिनियम और गुंडा एक्ट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। इतना ही नहीं, इरशाद थाना नगर (बस्ती) के एक मामले में सजायाफ्ता अपराधी भी है।
अवैध संपत्ति और लग्जरी लाइफस्टाइल पर सवाल
शिकायतकर्ताओं ने इस बात पर हैरानी जताई है कि आय का कोई ज्ञात वैध स्रोत न होने के बावजूद पिता-पुत्र की जोड़ी लग्जरी जीवनशैली जी रही है। खेती के नाम पर मात्र नाममात्र की जमीन होने के बावजूद, उनके पास महंगी गाड़ियों का काफिला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अकूत संपत्ति केवल मदरसे के फंड में हेराफेरी और समाज-विरोधी गतिविधियों का परिणाम है।शिकायत में यह भी उल्लेख है कि इन आरोपियों के पास जीविकोपार्जन का कोई वैध साधन नहीं है और खेती भी नाममात्र की है। इसके बावजूद, ये लोग अकूत संपत्ति के मालिक बने हुए हैं। आरोप है कि समाज-विरोधी गतिविधियों और भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित धन से ये लोग ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं और नई-नई लग्जरी गाड़ियां खरीद रहे हैं।
प्रशासन से आर-पार की लड़ाई
मदरसा प्रबंधन समिति के सदस्यों ने कमिश्नर से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच तुरंत शुरू की जाए। उन्होंने मांग की है कि:
- फर्जी आधार कार्ड के जरिए किए गए वित्तीय और प्रशासनिक घोटालों की जांच हो।
- आरोपी पिता-पुत्र पर तत्काल प्रभाव से सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज हो।
- आरोपियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की प्रवर्तन निदेशालय या अन्य सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए।
निष्कर्ष
सवाल अब यह उठता है कि एक सजायाफ्ता और दर्जनों मुकदमों में नामजद व्यक्ति एक धार्मिक शिक्षण संस्थान का संचालन कैसे कर सकता है? क्या प्रशासन इस मामले में रसूखदार अपराधियों पर नकेल कसेगा, या मदरसा प्रबंधन का यह खेल यूं ही चलता रहेगा? शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में अपराधियों का कब्जा न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह उन छात्रों और संस्था के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि कमिश्नर के स्तर से इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है। क्या प्रशासन इन रसूखदार अपराधियों की पहुंच को ध्वस्त कर पाएगा, या फिर यह शिकायत केवल फाइलों में दबकर रह जाएगी?
क्षेत्र में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और आम जनता की नजर अब जिम्मेदार अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी है।




















