
’डिजिटल डकैती’: सिंचाई विभाग का ‘एआई’ कारनामा, कागजों पर बहे करोड़ों, धरातल पर सूखा!
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल
- सिंचाई विभाग का ‘एआई’ कारनामा: बिना काम किए डकार लिए करोड़ों, क्या जांच में खुलेंगे ‘साहब’ के राज?
- बस्ती में करोड़ों का ‘डिजिटल’ घपला: बाढ़ टलने के बाद करोड़ों का भुगतान, जनता की सुरक्षा से खिलवाड़!
- क्या एआई बनेगा भ्रष्टाचार की ढाल? बस्ती सिंचाई विभाग के घोटाले ने खड़ा किया प्रशासनिक तंत्र पर सवाल!
सिद्धार्थनगर।। उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल में भ्रष्टाचार की एक ऐसी नई और घिनौनी पटकथा लिखी गई है, जिसने सरकारी तंत्र की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है। तकनीक के इस दौर में अब भ्रष्ट अधिकारियों ने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) को अपनी लूट का हथियार बना लिया है। जिस एआई का उपयोग विकास कार्यों को सुगम बनाने के लिए होना था, उसी का इस्तेमाल करके सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने ‘कागजी चमत्कार’ दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगा दिया है।
क्या है यह ‘डिजिटल घोटाला’?
बस्ती मंडल के ड्रेनेज खंड-4 (सिंचाई विभाग) ने भ्रष्टाचार की हदें पार करते हुए एक नायाब फार्मूला ईजाद किया। बाणगंगा एफ्लेक्स तटबंध की सुरक्षा, मरम्मत और नहरों की सफाई के नाम पर शासन से भारी-भरकम बजट स्वीकृत कराया गया। लेकिन, आरोप है कि धरातल पर काम करने के बजाय, विभाग ने एआई की मदद से फर्जी तस्वीरें बनाईं और उन्हें काम पूरा होने के सबूत के तौर पर पोर्टल पर अपलोड कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि बिना एक ईंट रखे, करोड़ों रुपयों का भुगतान भी कर दिया गया। भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री अमर बहादुर सिंह द्वारा उठाए गए इस गंभीर मुद्दे ने विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है।
करोड़ों बहे ‘पानी’ की तरह, जनता खतरे में
शिकायत के अनुसार, विभाग ने पूरे जिले के तटबंधों की अनदेखी करते हुए महज 7 फीसदी काम के एवज में कुल बजट का 26 प्रतिशत यानी 1 करोड़ 3 लाख 81 हजार 62 रुपये डकार लिए। सबसे भयावह पहलू यह है कि यह सारा खेल तब खेला गया जब बाढ़ का खतरा टल चुका था।
आज स्थिति यह है कि प्रथम, द्वितीय और तृतीय उपखंड के तहत आने वाले कई प्रमुख तटबंध बदहाल स्थिति में हैं। यदि समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगामी मानसून के दौरान दर्जनों गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और इसका खामियाजा सीधे तौर पर बेबस जनता को भुगतना पड़ेगा।
’साहब’ का बचाव और सवालों के घेरे में तंत्र
मामले के उजागर होते ही सिंचाई विभाग के अधिकारी लीपापोती में जुट गए हैं। ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता कृपाशंकर भारती का दावा है कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। लेकिन क्या इन खोखले दावों से करोड़ों के घपले पर पर्दा डाला जा सकता है?
- उच्च स्तरीय जांच की मांग: प्रशासनिक अमला अब हरकत में है। मंडलायुक्त बस्ती अखिलेश सिंह ने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
- सवालिया निशान: क्या यह जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी? क्या उन ठेकेदारों और इंजीनियरों पर कड़ी कार्रवाई होगी, जिन्होंने इस ‘एआई घोटाले’ के जरिए जनता की मेहनत की कमाई को ‘पानी’ में बहा दिया?
निष्कर्ष
तकनीक का विकास प्रगति के लिए होता है, लेकिन जब वही तकनीक भ्रष्टाचार की ढाल बन जाए, तो यह शासन और प्रशासन दोनों के लिए शर्म की बात है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और जवाबदेही चाहती है। देखना यह है कि क्या यह जांच इस डिजिटल डकैती का पर्दाफाश कर पाएगी, या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा?

















