
“कानूनी शिकंजे में ‘अनूप खरे’ परिवार: चेक बाउंस मामले में कोर्ट की सख्ती, बढ़ सकती हैं मुश्किलें”
"बस्ती में धोखाधड़ी का मामला: अनूप खरे परिवार के खिलाफ कोर्ट में पांच मुकदमे, गिरफ्तारी का खतरा"
अजीत मिश्रा (खोजी)
विशेष रिपोर्ट: बस्ती में ‘अनूप खरे’ परिवार पर कानूनी शिकंजा, चेक बाउंस और धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय की सख्ती
- “47 लाख का ‘खेल’, चेक बाउंस और कोर्ट के चक्कर: क्या जेल जाएगी अनूप खरे की टीम?”
- “फर्जीवाड़े का आरोप: अनूप खरे परिवार की बढ़ रही मुश्किलें, कोर्ट ने तलब किया”
बस्ती: हाल के दिनों में बस्ती जिले में अनूप खरे और उनके परिवार का मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ‘कोर्ट-कचहरी’ के चक्कर काट रहा यह परिवार अब गंभीर कानूनी संकट में है। न्यायालय द्वारा लगातार जारी किए जा रहे समन और एनबीडब्ल्यू (गैर-जमानती वारंट) इस बात की पुष्टि करते हैं कि मामला अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है।
विवाद की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोप
यह पूरा प्रकरण वित्तीय लेनदेन और चेक बाउंस से जुड़ा है। मुख्य शिकायतकर्ता नमन श्रीवास्तव के अनुसार, अनूप खरे और उनके परिवार के सदस्यों (दीप्ति खरे और दिव्यांशु खरे) ने विभिन्न बहाने बनाकर उनसे भारी धनराशि ली थी। आरोप है कि अनूप खरे ने ‘द हेरिटेज लैंड एंड हवाई अड्डा रेस्टोरेंट’ के प्रोपराइटर के रूप में अपनी भूमिका का उपयोग करते हुए ये लेन-देन किए।
चेक बाउंस और कानूनी कार्रवाई
नमन श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा दिए गए 47 लाख रुपये के पांच अलग-अलग चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
- न्यायालय का आदेश: न्यायालय ने अनूप खरे को धारा-138 (चेक बाउंस का मामला) के तहत तलब किया है। उन्हें 23 जून 2026 को न्यायालय में पेश होने का आदेश दिया गया है।
- एनबीडब्ल्यू का डर: केवल एक मामला नहीं, बल्कि अनूप खरे और दीप्ति खरे के खिलाफ एनबीडब्ल्यू भी जारी हो चुका है। इससे पूर्व भी न्यायालय से उन्हें कई बार समन भेजे जा चुके हैं।
धोखे का जाल: वादे और मुकर जाना
लेख में बताया गया है कि जांच के दौरान दिव्यांशु खरे ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 47 लाख रुपये वापस करने का लिखित वादा किया था। समझौते के तहत कुछ पोस्ट-डेटेड चेक दिए गए थे, लेकिन जब उन चेकों को बैंक में जमा किया गया, तो या तो वे बाउंस हो गए या परिवार द्वारा उनका भुगतान रुकवा दिया गया।
धमकाने और फर्जी आरोपों का आरोप
शिकायतकर्ता नमन श्रीवास्तव का कहना है कि पैसा वापस करने के बजाय, यह परिवार अब उन पर ही दबाव बना रहा है।
- फर्जी शिकायतें: आरोप है कि अनूप खरे के परिवार ने अपनी सुरक्षा के लिए नमन श्रीवास्तव के खिलाफ डीआईजी कार्यालय में फर्जी और आधारहीन शिकायतें दर्ज कराई हैं।
- गुंडागर्दी का आरोप: शिकायतकर्ता का दावा है कि अनूप खरे की पत्नी सीमा खरे और अन्य लोगों ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए नमन श्रीवास्तव और उनके परिवार को अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
- पुलिस जांच: पुलिस की जांच में नमन श्रीवास्तव पर लगे आरोपों को निराधार पाया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि नमन श्रीवास्तव ने कोई अवैध ब्याज की मांग नहीं की थी, बल्कि वे केवल अपना मूल धन वापस मांग रहे थे।
प्रमुख बिंदु:
विवाद का कारण: मुख्य रूप से चेक बाउंस होने के कई मामलों के कारण यह परिवार कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहा है।
कानूनी स्थिति: न्यायालय ने अनूप खरे को ‘द हेरिटेज लैंड एंड हवाई अड्डा रेस्टोरेंट’ के प्रोपराइटर के रूप में धारा-138 (चेक बाउंस) के तहत 23 जून 2026 को पेश होने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता नमन श्रीवास्तव के कुल 47 लाख रुपये के पांच चेक बाउंस हुए हैं।
आरोपों का विवरण:
- आरोप है कि अनूप खरे और उनका परिवार अवैध रूप से धन वसूलने और विभिन्न बहाने बनाकर (जैसे चुनाव, टेंडर, इलाज) पैसे ऐंठने का काम कर रहा था।
- जांच के दौरान, दिव्यांशु खरे ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 47 लाख रुपये वापस करने का वादा किया था और पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे, जो बाद में बाउंस हो गए या उनका भुगतान रोक दिया गया।
शिकायतकर्ता का पक्ष: नमन श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि परिवार न केवल भुगतान करने से बच रहा है, बल्कि उन पर और उनके परिवार पर दबाव बनाने के लिए फर्जी शिकायतें दर्ज करवा रहा है और धमकियां दे रहा है।
निष्कर्ष: गंभीर भविष्य की आहट
कानून के जानकारों का मानना है कि चेक बाउंस होने के मामलों में छह महीने से लेकर दो साल तक की जेल का प्रावधान है। बार-बार नोटिस मिलने और न्यायालय द्वारा तलब किए जाने के बावजूद, अनूप खरे परिवार द्वारा टाल-मटोल का रवैया अपनाना उनके लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है। बस्ती के कानूनी गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि क्या यह परिवार वाकई कानून के डर को समझ रहा है या उन्हें भारी कानूनी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।






















