मृतक महिला का बयान दर्ज करने वाला विवेचक निलंबित निलंबित उपनिरीक्षक की विभागीय जांच करेंगे सीओ
मुंडेरवा थाने का मामला: उपनिरीक्षक जावेद खान ने मृत महिला का बयान किया दर्ज। गंभीर लापरवाही: महिला की मौत दो साल पहले हो चुकी थी, विवेचना में हेरफेर का आरोप। एसपी की सख्त कार्रवाई: एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने उपनिरीक्षक को किया निलंबित। जांच के आदेश: मामले की विभागीय जांच क्षेत्राधिकारी (CO) को सौंपी गई।
अजीत मिश्रा (खोजी)
मृतका का बयान दर्ज करने वाले उपनिरीक्षक पर गिरी गाज, एसपी ने किया निलंबित
- मुंडेरवा थाने पर तैनात रहे उपनिरीक्षक जावेद खान
- इसे विवेचना में हेरफेर और गंभीर लापरवाही माना गया है
बस्ती: पुलिस विभाग में घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुंडेरवा थाने में तैनात उपनिरीक्षक (एसएसआई) जावेद खान को उस समय निलंबित कर दिया गया, जब यह खुलासा हुआ कि उन्होंने एक ऐसी महिला का बयान दर्ज किया, जिसका निधन दो साल पहले ही हो चुका था।
क्या है पूरा मामला?
मुंडेरवा थाना क्षेत्र से जुड़े एक आपराधिक मामले की विवेचना (जांच) का जिम्मा उपनिरीक्षक जावेद खान को सौंपा गया था। फाइलों की जांच के दौरान जब उच्चाधिकारियों ने दस्तावेजों का मिलान किया, तो वे दंग रह गए। विवेचक ने अपनी जांच रिपोर्ट में एक ऐसी महिला के बयान दर्ज करना दिखाया, जो दो वर्ष पूर्व ही इस दुनिया से विदा हो चुकी थी।
एसपी की सख्त कार्रवाई
इस गंभीर लापरवाही और पुलिस की छवि धूमिल करने के आरोप को संज्ञान में लेते हुए बस्ती के एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने त्वरित कार्रवाई की।
- निलंबन और जांच: आरोपी उपनिरीक्षक जावेद खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- विभागीय जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, जो एक क्षेत्राधिकारी (सीओ) द्वारा की जाएगी।
- सख्ती का संदेश: एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि जांच में इस तरह की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी अधिकारी या कर्मचारी जांच के साथ खिलवाड़ करेगा, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अन्य मामलों की भी होगी समीक्षा
विभाग अब उन अन्य मामलों की भी समीक्षा कर रहा है, जिनकी जांच निलंबित उपनिरीक्षक द्वारा की जा रही थी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं इन मामलों में भी किसी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर तो नहीं की गई है।
फिलहाल, विभागीय जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि यह घोर लापरवाही उपनिरीक्षक द्वारा जानबूझकर की गई थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है।








