मगरमच्छ और घड़ियालों राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा नदी की बढ़ती मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है
इन जलीय जीवों के दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
सिद्धार्थनगर समेत नेपाल सीमा से सटे तराई के जिलों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद मगरमच्छ और घड़ियालों की बढ़ती मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा नदी के किनारे कई जगह इन जलीय जीवों के दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।


करीब पांच दिन पहले आई बाढ़ के दौरान नेपाल से निकलने वाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था। अब पानी घटने के साथ मगरमच्छ और घड़ियाल विभिन्न घाटों और नदी किनारों पर दिखाई देने लगे हैं। करीब 10 दिन पहले सोहांस के पास कूड़ा नदी किनारे घड़ियाल देखा गया था, जबकि रविवार को बूढ़ी राप्ती के ककरही घाट पर एक मगरमच्छ अपने बच्चे के साथ नजर आया।
हाल के दिनों में आसपास के जिलों से भी मगरमच्छों के हमले और पकड़े जाने की घटनाएं सामने आई हैं। बहराइच में 16 जुलाई को मगरमच्छ ने 12 वर्षीय बालक को अपना शिकार बना लिया था। वहीं महराजगंज के गेड़हवा गांव में मछली पकड़ रहे एक युवक पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिसे ग्रामीणों ने बहादुरी दिखाकर बचाया। बलरामपुर और लखीमपुर खीरी में भी मगरमच्छ मिलने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
वन विभाग का कहना है कि बाढ़ के तेज बहाव के साथ मगरमच्छ नेपाल की ओर से भारतीय सीमा तक बहकर आ गए होंगे। उप प्रभागीय वनाधिकारी बीना तिवारी के अनुसार, जैसे-जैसे नदियों का जलस्तर सामान्य होगा, इनके वापस अपने प्राकृतिक आवास में लौटने की संभावना है।
प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि नदी किनारे अकेले न जाएं, बच्चों को पानी के पास न खेलने दें और स्नान, मछली पकड़ने या पशुओं को पानी पिलाने के दौरान विशेष सतर्कता बरतें।








