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Coal India के अधिकारियों को झटका, विजिलेंस केस में दागी हुए तो नहीं मिलेगा PRP का एक भी रुपया

*धनबाद।* कोल इंडिया लिमिटेड ने अधिकारियों के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (परफॉर्मेंस रिलेटेड पे-पीआरपी) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि किसी अधिकारी को किसी विजिलेंस (सतर्कता) मामले में “निंदा (सेंसर)” की सजा मिलती है, तो वह पीआरपी का कोई भी लाभ नहीं ले सकेगा।

कंपनी ने भ्रष्टाचार और जवाबदेही के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए यह व्यवस्था लागू की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में तबादला नीति में बदलाव को लेकर कोल इंडिया के अधिकारियों में असंतोष देखने को मिला था।

विभिन्न अधिकारी संगठनों ने इस संबंध में प्रबंधन को पत्र भी भेजे हैं। इसी बीच पीआरपी नियमों में संशोधन ने अधिकारियों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ स्पष्ट संदेश

कोल इंडिया प्रबंधन का मानना है कि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन केवल कार्य निष्पादन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही भी शामिल होनी चाहिए। नए प्रावधान का उद्देश्य अधिकारियों में अनुशासन की भावना मजबूत करना और भ्रष्टाचार के मामलों में शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) का संदेश देना है।

कंपनी का कहना है कि इससे कार्य संस्कृति अधिक पारदर्शी होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

बोर्ड की 492वीं बैठक में हुआ फैसला

कोल इंडिया की ओर से चार अगस्त 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार यह संशोधन एक्जीक्यूटिव वेतन पुनरीक्षण-2017 के अध्याय-1 की धारा-10 की उपधारा 8 (11)(सी) में किया गया है।

यह बदलाव 27 जुलाई 2026 को आयोजित कोल इंडिया निदेशक मंडल की 492वीं बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर लागू किया गया है।

क्या कहता है नया प्रावधान?

संशोधित नियम के अनुसार, एक अप्रैल 2024 या उसके बाद यदि किसी अधिकारी को अनुशासनात्मक, अपीलीय अथवा पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा “निंदा (सेंसर)” की सजा दी जाती है, तो सामान्य परिस्थितियों में निर्धारित शर्तों के अधीन उसे शुद्ध पीआरपी का 75 प्रतिशत तक भुगतान किया जा सकता है।

लेकिन यदि यही “निंदा” की सजा किसी विजिलेंस मामले से जुड़ी है, तो संबंधित अधिकारी को पीआरपी का एक भी रुपया नहीं मिलेगा। ऐसे अधिकारी पूरी तरह पीआरपी के लिए अयोग्य माने जाएंगे।

पहले क्या थी व्यवस्था?

अब तक लागू नियमों में बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने जैसे मामलों में यदि किसी अधिकारी को “निंदा” की सजा मिलती थी, तो उसे पीआरपी में मिलने वाली राहत का लाभ नहीं मिलता था।

अब कंपनी ने नियमों का दायरा बढ़ाते हुए विजिलेंस मामलों को अधिक गंभीर श्रेणी में रखा है और ऐसे मामलों में पीआरपी पूरी तरह समाप्त करने का प्रावधान जोड़ दिया है।

अन्य नियम यथावत रहेंगे

कोल इंडिया ने स्पष्ट किया है कि एक्जीक्यूटिव वेतन पुनरीक्षण-2017 के अन्य सभी नियम और प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। संशोधन केवल पीआरपी से जुड़े इस विशेष प्रावधान में किया गया है।

सभी अनुषंगी कंपनियों को भेजा गया आदेश

संशोधित आदेश कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों और संबद्ध इकाइयों को भेज दिया गया है। इनमें बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल, एसईसीएल, एनसीएल, डब्ल्यूसीएल, एमसीएल और सीएमपीडीआईएल सहित सभी इकाइयां शामिल हैं। अब इन सभी कंपनियों में यह नया नियम प्रभावी रहेगा।

क्यों अहम है यह फैसला?

कोल इंडिया का यह कदम केवल वेतन संबंधी संशोधन नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पहली बार कंपनी ने विजिलेंस मामलों को सीधे प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन से जोड़ दिया है। इससे अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार अथवा सतर्कता संबंधी मामलों में दोषी पाए जाने पर आर्थिक प्रोत्साहन भी प्रभावित होगा।

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