
प्रशासनिक फ़रमान पर प्रमाणपत्र तैयार करने शिक्षकों को करनी पड़ रही है कड़ी मशक्कत
महासमुन्द – जिले में प्रशासनिक फ़रमान पर स्कूली शिक्षकों को बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन दिनों कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। दरअसल शत-प्रतिशत बच्चों का प्रमाण-पत्र बनाने स्कूल के शिक्षकों को निर्देशित किया गया है। इस कार्य के लिए स्कूल शिक्षक अध्ययन अध्यापन कार्य छोड़कर पालकों के घर घर ख़ाक छानते फिर रहे हैं। अनेक शिक्षकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि लगातार बच्चों के प्रमाणपत्र तैयार करने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं, जबकि इन दिनों खेती किसानी का समय चल रहा है जिससे ग्रामीण पालक फसल कटाई सहित अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं जिससे बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र, सत्यापित आधार कार्ड आदि समय पर नहीं मिल पा रहे हैं और बच्चों के पालक इसको लेकर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि शिक्षकों पर ही प्रमाण-पत्र बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे जहां स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है वहीं दूसरी ओर शिक्षक वर्ग भी परेशान है।
कहां आ रही है परेशानी
बच्चों के प्रमाणपत्र तैयार करने में एक तरफ खेती किसानी की व्यस्तता की वजह से अभिभावक जहां ध्यान नहीं दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर बच्चों का आधार अपडेट नहीं होने, समय पर पटवारी और उनका प्रतिवेदन नहीं मिल पाने, वंशावली नहीं मिलने, सरकारी दस्तावेजों में पृथक-पृथक नाम दर्ज होने, नाम में त्रुटि होने जैसी समस्याओं की वजह से वास्तविक दस्तावेज शिक्षकों को समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। और बच्चों का प्रमाण-पत्र बनवाने में शिक्षकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूलों में अध्ययन अध्यापन पर असर
प्रमाणपत्र के लिए दस्तावेज संकलन और अभिभावकों से सतत् सम्पर्क की वजह से शिक्षकों का अधिकांश समय जाया हो जा रहा है, हम आपको बता दें जिले की अनेक शालाएं एकल शिक्षकीय है, जबकि कई जगह प्रधानपाठक सहित दो शिक्षक ही सभी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी सम्हाल रहें हैं, ऐसे में प्रमाणपत्र के लिए शिक्षकों के व्यस्त हो जाने से स्कूलों में अध्ययन अध्यापन कार्य भी प्रभावित होते देखा जा रहा है।






