
*मुझे आज भी वो दिन याद है जब नक्सलियों के कब्जे से हमारी कोबरा बटालियन के जवान*

श्री राकेश्वर सिंह मन्हास को नक्सलियों के चंगुल से रिहा कराने वाली मध्यस्थ टीम मुख्यमंत्री निवास रायपुर में मुझसे भेंट करने आयी थी.
साहसी पत्रकार मुकेश चंद्राकर उस मध्यस्थ टीम के प्रमुख सदस्य थे. उनके साहस के लिए मैंने उनकी पीठ थपथपाई थी.
मुकेश के साथ जो हुआ है, वह बेहद दुर्भाग्यजनक है. सिर्फ शब्दों से निंदा कर देने से क्षति और असुरक्षा का समाधान नहीं हो सकता.
ना ही इस विषय पर कोई राजनीतिक टिप्पणी करना चाहूँगा.
सरकार से अनुरोध है कि त्वरित जाँच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और ऐसी नज़ीर पेश हो कि अपराधियों में संदेश जाए.
साथ ही मुकेश के परिवार का ध्यान रखने के लिए सरकार को आर्थिक सहायता, नौकरी पर भी निर्णय लेना चाहिए.
साहसी पत्रकार मुकेश चंद्राकर को हम सब छत्तीसगढ़वासियों की विनम्र श्रद्धांजलि.
ईश्वर उनके परिवार को हिम्मत दे. ॐ शांति:





