

बहुजन समाज की बेटियों की सुरक्षा पर सवाल: कब मिलेगा न्याय?
नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश: देश में यौन हिंसा और बलात्कार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और आश्चर्यजनक रूप से पीड़िताओं में ज्यादातर दलित, पिछड़े और वंचित समाज की बेटियां ही होती हैं। हाल ही में स्नेह कुशवाहा, अंजली प्रजापति और कोमल पासवान के साथ हुई घटनाओं ने बहुजन समाज के लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
🔴 घटनाएं जो हिला देने वाली हैं:
स्नेह कुशवाहा (वाराणसी):
NEET की तैयारी कर रही छात्रा थी।
परिवार का आरोप है कि बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई।
पुलिस इस मामले को आत्महत्या बताने में लगी हुई है।
अंजली प्रजापति (मुजफ्फरनगर):
कुछ दिनों से लापता थी।
शव नहर में बहता मिला।
अभी तक पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
कोमल पासवान:
अपने परिवार का सहारा थी।
बलात्कार के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई।
समाज और सरकार इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
🔴 बहुजन समाज की बेटियों पर बढ़ते हमले, सरकार मौन?
इन घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आखिर बहुजन समाज की बेटियां ही क्यों निशाना बन रही हैं? क्या यह जातिगत हिंसा का एक नया रूप है?
बहुजन समाज के लोग अब अपनी बेटियों को पढ़ाने और नौकरी के लिए बाहर भेजने से डरने लगे हैं। अगर सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी, तो यह समाज आगे कैसे बढ़ेगा?
🔴 न्याय की मांग और सरकार की जिम्मेदारी
सरकार को इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए।
दोषियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए।
बहुजन समाज की बेटियों की सुरक्षा को लेकर कड़े कानून और पॉलिसी बनानी होगी।
अगर समाज और सरकार ने अब भी चुप्पी साधे रखी, तो आने वाले दिनों में यह एक बड़ा सामाजिक संकट बन सकता है। आखिर कब तक हमारी बेटियां डर के साए में जिएंगी? कब मिलेगा न्याय?
📍 विशेष रिपोर्ट | ✍️ संपादक: एलिक सिंह, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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