

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के कथित व्यवहार को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान दलित समुदाय के लोगों के साथ पुलिस ने अभद्र व्यवहार किया तथा अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। इन आरोपों के बाद निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठ रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बयानों और पोस्टों में कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन अलग-अलग समुदायों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान अलग-अलग रवैया अपनाता है। उनका कहना है कि प्रभावशाली वर्गों के प्रदर्शन के समय प्रशासन का व्यवहार अपेक्षाकृत नरम रहता है, जबकि दलित समुदाय के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर सख्ती और दुर्व्यवहार के आरोप लगते हैं।
इसी क्रम में एसएसपी अविनाश पांडेय के खिलाफ भी अभद्र भाषा के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी या पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है। कुछ लोग अधिकारी के समर्थन में अभियान चला रहे हैं, जबकि दूसरी ओर दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, पूरे मामले में आधिकारिक जांच या सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।







