A2Z सभी खबर सभी जिले की

एकलव्य विश्वविद्यालय के सहा. प्राध्यापक डॉ. हृदय नारायण तिवारी से जनसंपर्क पर वैश्विक प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला की वार्ता कार्यक्रम

न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह एवं देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के अवसर पर 30 मई से 30 जून 2025 तक आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 के अंतर्गत दिनांक 3 जून 2025, शाम 7:30 बजे हिंदी पत्रकार एवं लेखक बालकृष्ण भट्ट की 182वीं जयंती के अवसर पर हिंदी में “उच्च शिक्षण संस्थानों में जनसंपर्क कार्य” विषय पर ‘विशेषज्ञ से वार्ता’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदी सचिवालय के पूर्व महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने किया और मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय (सांध्य) के प्रो. हरीश अरोड़ा रहे। विषय विशेषज्ञ के रूप में एकलव्य विश्वविद्यालय दमोह के हिंदी विभाग, सहायक प्राध्यापक डॉ. हृदय नारायण तिवारी और कुशल मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ आभासी पटल पर जुड़े सभी विद्वानों के स्वागत परिचय से हुआ। इसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर मिश्रा ने आशीर्वचन प्रदान किया। इस अवसर पर भारत के साथ ही विश्व के अनेक देशों जैसे मॉरीशस, यूरोप, आस्ट्रेलिया, मलेशिया, कतर, थाईलैंड आदि देशों से प्रतिष्ठित विद्वान, साहित्यकार, पत्रकार और शोधार्थियों ने सहभागिता की। इस वार्ता में डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा जनसंपर्क से संबंधित पूछे गए अनेक प्रश्नों जैसे- जनसंपर्क में हिंदी भाषा का उपयोग, हिंदी भाषा की प्रेस विज्ञप्ति, हिंदी भाषा में जनसंपर्क की चुनौतियाँ, हिंदी भाषी क्षेत्र में जनसंपर्क के लिए प्रभावी माध्यम, सोशल मीडिया पर जनसंपर्क सामग्री प्रस्तुत करने की रणनीति, उच्च शिक्षण संस्थानों में जनसंपर्क कार्य का महत्व, हिंदी भाषा में जनसंपर्क विभाग की कार्ययोजना, भविष्य में जनसंपर्क कार्य की चुनौतियाँ और अनेक जिज्ञासाओं पर डॉ. हृदय नारायण तिवारी द्वारा बड़े ही सरल और सहज शब्दों में समाधान प्रस्तुत करते हुए बताया कि जनसंपर्क का कार्य लोगों, संगठनों, दलों एवं संस्थानों के बीच विश्वास कायम करने एवं सेतु के रूप में है। जनसंपर्क के लिए संक्षिप्तता, विश्वसनीयता, शुद्धता एवं प्रतिबद्धता आवश्यक है। वर्तमान में प्रामाणिक संदेश देना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अतिरिक्त वार्ताकार द्वारा विषय से संबंधित विस्तृत संवाद स्थापित किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रो.हरीश अरोड़ा ने जनसंपर्क के विराट फलक को रेखांकित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को पटल पर रखा। अध्यक्षीय उद्बोधन के दौरान प्रोफेसर मिश्रा ने हिंदी भाषा की तमाम चुनौतियों को रेखांकित करते हुए जनसंपर्क के प्रशिक्षण को आवश्यक माना। कार्यक्रम के अंत में वैश्विक प्रधान संपादक, सृजन समूह डॉ. शैलेश शुक्ला जी ने आभासी पटल पर जुड़े सभी विद्वानों, साहित्यकारों, पत्रकारों, शोधार्थियों एवं संरक्षक निदेशक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला के साथ ही पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

Back to top button
error: Content is protected !!