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उदयपुर ब्यूरो चीफ/लिम्बाराम उटेर#
कोटड़ा- सोकली कुमारी (बदला हुआ नाम), जो खाम गाँव के सरकारी विद्यालय में पढ़ती हैं, को एक साल पहले कंप्यूटर और लैपटॉप के बीच का अंतर नहीं पता था। आज न केवल उन्हें यह अंतर पता है, बल्कि वे लैपटॉप में वर्ड डॉक्युमेंट खोलना, उसमें लिखना, विभिन्न फ़ॉर्मैट बदलना और उसे डेस्कटॉप पर सेव करना भी जानती हैं। सोकली की इस प्रगति के पीछे लोगों का योगदान है — जैसे उनके विद्यालय के शिक्षक, उजाला फ़ाउंडेशन की टीम सदस्य मेवा कुमारी आदि। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है अमेरिका में रह रही भारतीय प्रवासी डॉ. दिलशाद दयानी का। डॉ. दिलशाद दयानी टीचर्स कॉलेज, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क, अमेरिका में ऑर्गनाइज़ेशनल साइकोलॉजी की एडजंक्ट एसोसिएट प्रोफ़ेसर हैं। वे न्यूयॉर्क स्थित सोशल कैपिटल इनिशिएटिव्स नामक संस्थान की बोर्ड सदस्य हैं, जिसने सोशल कैपिटल क्रेडिट्स कार्यक्रम को जनवरी 2025 में कोटड़ा में शुरू किया। इस कार्यक्रम के तहत मेंटर्स यानी कक्षा 7 से 9 के छात्र, मेंटीज़ यानीकक्षा 1 से 5 के छात्रों को सरकारी विद्यालयों में अंतिम आधे घंटे में सीखने में मदद करते हैं। इस तरह वे सोशल कैपिटल अर्जित करते हैं, जिसे वे डिजिटल साक्षरता की दिशा में कदम बढ़ाने में खर्च करते हैं । जिन लैपटॉप्स पर ये छात्र प्रशिक्षण ले रहे हैं, वे डॉ. दिलशाद दयानी द्वारा सोशल कैपिटल इनिशिएटिव्स को दान किए गए थे, जिन्होंने उन्हें कोटड़ा में पिछले आधे दशक से कार्य कर रही उजाला फ़ाउंडेशन को दिए। उजाला फ़ाउंडेशन के प्रथाराम बताते हैं कि यह कार्यक्रम फिलहाल कोटड़ा की पाँच राजकीय उच्चमाध्यमिक विद्यालयों में चल रहा है, जिससे बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में इसे अन्य सरकारी विद्यालयों तक विस्तार देने की योजना है। उजाला फ़ाउंडेशन के नानालाल बताते हैं कि लगभग 50% छात्र लैपटॉप चालू और बंद करना जानते हैं, और करीब 20% छात्र वही कार्य कर सकते हैं जो सोकली कर सकती हैं। यह सब डॉ. दिलशाद दयानी जैसी प्रेरणादायी हस्तियों के योगदान के बिना संभव नहीं हो पाता। हमारा प्रयास है कि कोटड़ा में अधिक से अधिक लोग डिजिटल साक्षर बनें। इसमें हमारा साथ सरकारी विद्यालयों के शिक्षक, उज्जैन स्थित संस्थान मेरा गाँव मेरी दुनिया, और कोटड़ा आदिवासी संस्था दे रहे हैं।









