A2Z सभी खबर सभी जिले की

गल्ला कारोबार की आड़ में किसानों से चार करोड़ ठगी

एक साल तक चलता रहा खेल, अब गिरोह सलाखों के पीछे

जनपद में गल्ला व्यापार की आड़ में किसानों से चार करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। इटवा और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय एक गिरोह ने सैकड़ों किसानों से उधार पर धान और गेहूं खरीदा, लेकिन भुगतान किए बिना फरार हो गया। यह ठगी एक साल से चल रही थी, जिसका अब पर्दाफाश हुआ है।

IMG 20260128 075202

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह ठगी सुनियोजित तरीके से की गई थी। गिरोह के सदस्य खुद को विश्वसनीय

गल्ला व्यापारी बताते थे। शुरुआत में किसानों से छोटे लेन-देन किए गए और समय पर भुगतान कर उनका विश्वास जीता गया। एक बार जब बड़ी मात्रा में फसल उनके हाथ लगी, तो उन्होंने भुगतान रोक दिया और धीरे-धीरे इलाके से गायब हो गए।

इस ठगी का किसानों पर आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ा है। अपनी साल भर की मेहनत गंवाने के बाद कई किसान कर्ज में डूब गए हैं। उन्हें बीज, खाद और मजदूरी के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा। कुछ पीड़ित किसानों ने बताया कि भुगतान न मिलने के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और घर चलाना मुश्किल हो गया।

पीड़ित किसानों की शिकायतों के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि यह ठगी केवल एक-दो किसानों तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक बड़े नेटवर्क

द्वारा अंजाम दी गई थी। इटवा के अलावा, बलरामपुर जिले के किसान भी इस गिरोह का शिकार बने थे। कुल गबन की राशि लगभग चार करोड़ रुपए आंकी गई है।

जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह का संचालन पारिवारिक स्तर पर किया जा रहा था, जिसमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे। वे एक ही पते से गल्ला खरीदते थे और लेन-देन का रिकॉर्ड अव्यवस्थित रखते थे। दबाव बढ़ने पर वे नाम और पता बदलने की तैयारी पहले से ही रखते थे।

इटवा थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपियों ने सिद्धार्थनगर और बलरामपुर के लगभग 100 से अधिक किसानों से गेहूं और चावल की खरीद की थी। जिलाधिकारी सिद्धार्थ नगर से अनुमोदन लेने के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!