
मॉडल विद्यालय बुढ़मू में भ्रष्टाचार का खेल उजागर।।
“संवेदक–जेई की मिलीभगत या राजनीतिक संरक्षण?”
“घटिया निर्माण पर शिक्षा विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधि कटघरे में”
रिपोर्टर/ राशीद अंसारी
बुढ़मू। बुढ़मू प्रखंड स्थित मॉडल विद्यालय में चल रहे नए भवन निर्माण एवं पुराने भवन के मरम्मती कार्य ने शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी योजनाओं के तहत बनने वाला यह “मॉडल विद्यालय” अब भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक बनता नजर आ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य में खुलेआम घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसके बावजूद अब तक न तो किसी अधिकारी ने ठोस कार्रवाई की और न ही निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई। इससे संवेदक और विभागीय कनिष्ठ अभियंता (जेई) की मिलीभगत के साथ-साथ राजनीतिक संरक्षण की आशंका और गहरी हो गई है।
“घटिया ईंट–सीमेंट से बन रहा ‘मॉडल’ विद्यालय”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय के नए भवन निर्माण में
बंगला भट्ठा की कमजोर और खोखली ईंट
कोणार्क कंपनी का निम्न गुणवत्ता वाला सीमेंट
मिट्टी मिश्रित बालू
का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे भवन की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सरकारी राशि की खुली लूट है।
“विभागीय जेई की चुप्पी पर सवाल”
सबसे अहम सवाल यह है कि जब यह निर्माण कार्य विभागीय देखरेख में हो रहा है, तो विभागीय कनिष्ठ अभियंता (जेई) की मौजूदगी में यह सब कैसे संभव हो रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना जेई की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर घटिया निर्माण संभव ही नहीं है। जेई की चुप्पी अब संदेह के घेरे में आ चुकी है।
“जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी संदिग्ध”
मामले ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद न तो किसी जनप्रतिनिधि ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और न ही मामले को उच्च अधिकारियों तक गंभीरता से पहुंचाया।
“ग्रामीणों का सीधा सवाल है—
क्या घटिया निर्माण को राजनीतिक संरक्षण का कवच प्राप्त है?
मरम्मती कार्य में भी भारी लापरवाही
विद्यालय के पुराने भवन की मरम्मत के नाम पर भी सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार—
दीवारों में ढंग से पुट्टी नहीं की गई
जर्जर दीवारों पर अधूरा और कमजोर प्लास्टर किया गया
प्लंबर और विद्युत कार्य पूरी तरह अव्यवस्थित है
मरम्मती कार्य सिर्फ कागजों पर पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है।
“बच्चों की जान से खिलवाड़”
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस तरह के घटिया निर्माण और लापरवाही से स्कूली बच्चों की जान खतरे में है। यदि भविष्य में कोई हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संवेदक, संबंधित जेई, विभागीय अधिकारियों और मौन साधे जनप्रतिनिधियों की होगी।
“ग्रामीणों की प्रशासन से मांग”
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों और झारखंड सरकार से मांग की है कि—
पूरे निर्माण एवं मरम्मती कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
दोषी संवेदक और विभागीय जेई पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो
यदि राजनीतिक संरक्षण है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक आंख मूंदे रहता है, या फिर बच्चों की सुरक्षा और सरकारी धन की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।





