
निवाड़ी।
मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन निवाड़ी द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े के निर्देशानुसार जिले की समस्त शासकीय शालाओं में स्थित जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) भवनों एवं कक्षों का तत्काल चिन्हांकन कर उन्हें अनुपयोगी घोषित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
प्रमुख निर्देश एवं समय-सीमा:
चिन्हांकन एवं प्रमाणीकरण:
कलेक्टर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एवं जिला परियोजना समन्वयक (DPC) को निर्देशित किया गया है कि वे जिले के सभी शासकीय विद्यालयों का सूक्ष्म निरीक्षण कर असुरक्षित भवनों की पहचान सुनिश्चित करें।
उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध:
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में जर्जर भवनों या कक्षों में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी। संबंधित अधिकारियों को 10 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि जिले की किसी भी शाला में जर्जर भवन का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
नियमित समीक्षा:
उक्त कार्य की प्रगति की समीक्षा आगामी समय-सीमा (T.L.) बैठक में जिला स्तर पर की जाएगी। कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
अनुपयोगी घोषित किए गए ढांचों को नियमानुसार निष्प्रयोज्य करने की कार्यवाही भी शीघ्र सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को शून्य किया जा सके।
“हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले का हर बच्चा एक सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करे। जर्जर भवनों का उपयोग तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।”
— कलेक्टर जमुना भिड़े



