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सांस्कृतिक संध्या के साथ जारी हुआ साहित्यिक रोडमैप, घोषणा-पत्र से नई दिशा में बढ़ा चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव–2026

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा के साथ संपन्न हुआ राष्ट्रीय आयोजन

सांस्कृतिक संध्या के साथ जारी हुआ साहित्यिक रोडमैप, घोषणा-पत्र से नई दिशा में बढ़ा चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव–2026

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा के साथ संपन्न हुआ राष्ट्रीय आयोजन

समापन नहीं, सांस्कृतिक संकल्प का शंखनाद बना चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव–2026

Vandebharat live tv news- District Head, Nishant pandit चित्तौड़गढ़। वर्ष 2010 से निरंतर संचालित 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन की श्रृंखला में आयोजित तीन दिवसीय चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव–2026 का भव्य समापन शुक्रवार रात सांस्कृतिक संध्या और संस्थापक-प्रवर्तक अनिल सक्सेना द्वारा घोषणा-पत्र के ऐतिहासिक वाचन के साथ हुआ। ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ की पावन धरा पर आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन ने साहित्य, संस्कृति, लोककला और युवा चेतना का विराट संगम प्रस्तुत किया।

तीन दिनों में जिले के लगभग 6700 छात्र-छात्राएं, युवा और साहित्यप्रेमी उत्सव से जुड़े। देश के विभिन्न जिलों से आए 247 से अधिक साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इसे केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।

उत्सव की गरिमा देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति से और बढ़ी। पद्मश्री डॉ. सी. पी. देवल (अजमेर), पद्मश्री डॉ. उर्मिला श्रीवास्तव (मिर्जापुर), पद्मश्री जानकी राम भांड (भीलवाड़ा), पद्मश्री मुन्ना मास्टर (बगरू) तथा पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल (राजसमंद) की सहभागिता ने आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठा प्रदान की। अपने उद्बोधनों में उन्होंने भारतीय संस्कृति, लोकपरंपरा और साहित्य के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

सरकारी सहभागिता और पुस्तक संस्कृति का उत्सव

राजस्थान सरकार के कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी बसंत सिंह के मार्गदर्शन में सात प्रमुख पुस्तक स्टॉल स्थापित किए गए। इनमें राजस्थान साहित्य अकादमी (उदयपुर), हिंदी ग्रंथ अकादमी (जयपुर), राजस्थान राज्य अभिलेखागार (उदयपुर), राजस्थान प्राच्य प्रतिष्ठान (उदयपुर), सूचना केंद्र (चित्तौड़गढ़), कलमकार मंच (जयपुर), गौतम बुक (जयपुर) तथा नवीन पांडेय द्वारा अकादमिक प्रकाशनों के स्टॉल शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त एक दर्जन से अधिक पुस्तक स्टॉल और आकर्षक कला दीर्घा यूथ मूवमेंट राजस्थान के तत्वावधान में स्थापित की गईं। तीनों दिनों तक यहाँ छात्र-छात्राओं, युवाओं और बुजुर्ग साहित्यप्रेमियों का निरंतर जमघट लगा रहा। नई पुस्तकों, लोक साहित्य, शोध कृतियों और कला प्रदर्शनी ने उत्सव को जीवंत बौद्धिक वातावरण प्रदान किया।

सांस्कृतिक संध्या में सजी परंपरा और नवचेतना

समापन दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ सेंट्रल एकेडमी के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। विजन कॉलेज के विद्यार्थियों ने नवदुर्गा स्तुति के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाया।
बाल कलाकार अनिक पुरी ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं में राष्ट्रभाव का संचार किया। कालिका ज्ञान केंद्र के विद्यार्थियों ने राजस्थानी सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर मरुधरा की लोक परंपरा को मंच पर सजीव किया।
एम्स एकेडमी के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत फोन एडिक्शन विषयक लघु नाटिका ने सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। भव्या जोशी ने राधा-कृष्ण थीम पर एकल नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों की सराहना प्राप्त की। भदेसर गांव के महेंद्र ने अपने बांसुरी वादन से वातावरण को मधुर सुरों से सराबोर कर दिया। एस.के. इवेंट्स, उदयपुर द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी एकल नृत्य ने लोक लय की मोहक छटा बिखेरी।
जैसलमेर से पधारे बूंदा खान एवं उनकी पार्टी ने पारंपरिक लोक गायन से सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। अमित चेचानी (चित्तौड़गढ़) और महेश सक्सेना (रावतभाटा) ने सुमधुर गीत प्रस्तुत कर सांस्कृतिक संध्या को नई ऊँचाई दी। दीपों से सजे मंच, लोकधुनों पर झूमते दर्शक और युवा-वरिष्ठ की संयुक्त उपस्थिति ने समापन को भावनात्मक और ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

गरिमामयी उपस्थिति

सांस्कृतिक संध्या की अध्यक्षता शिक्षाविद डॉ. के. एस. कंग ने की। मुख्य अतिथि डॉ. कल्याणी दीक्षित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में शिव मृदुल एवं कवि अब्दुल जब्बार उपस्थित थे। स्वागत भाषण आयोजक एवं यूथ मूवमेंट राजस्थान के संस्थापक अध्यक्ष शाश्वत सक्सेना ने दिया। उन्होंने कहा कि यह उत्सव युवा ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक संवाद का सशक्त मंच है। कार्यक्रम समन्वयक शांति सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।

घोषणा-पत्र जारी, भविष्य का स्पष्ट रोडमैप

समापन अवसर पर 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव–2026 का घोषणा-पत्र जारी करते हुए भविष्य की दिशा स्पष्ट की। उन्होंने राजस्थान के प्रत्येक जिले में साहित्यिक संवाद मंच की स्थापना, युवा लेखन कार्यशालाओं और प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन, लोकभाषाओं एवं लोकसंस्कृति संरक्षण अभियान, “एक जिला–एक साहित्य उत्सव” मॉडल को बढ़ावा, डिजिटल साहित्य मंच के निर्माण तथा युवा लेखकों को प्रकाशन सहयोग उपलब्ध कराने की घोषणा की।

उन्होंने कहा,“यह आंदोलन केवल आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मसम्मान और बौद्धिक स्वावलंबन का अभियान है। चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक धरा से उठी यह साहित्यिक मशाल अब राजस्थान के हर जिले तक पहुँचेगी। यह समापन नहीं, एक नए साहित्यिक अध्याय का प्रारंभ है।”
तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य, संस्कृति और युवा शक्ति का समन्वय ही समाज को नई दिशा देता है। 6700 युवाओं की सक्रिय सहभागिता और व्यापक जनसमर्थन के साथ संपन्न यह उत्सव अब एक उद्देश्यपूर्ण सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में स्थापित हो चुका है।

चित्तौड़गढ़ के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया

यूथ मूवमेंट के तत्वावधान में चित्तौड़गढ़ के कलाकारों ने अपनी कला प्रदर्शनी लगाई। इस अवसर पर नीव वैष्णव, रित्वी राठौड़, चित्रांशा माली, महेश सक्सेना, दीपाली स्वर्णकार, अजय मिश्रा, अभय मुंशी, आरती प्रजापत, किरण चौहान, एकता, अर्चना सिंह नेगी, सुरेश जांगिड़ और प्रीति अजमेरा ने अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन किया।
सेंट्रल अकादमी, चित्तौड़गढ़ तथा चेतन प्रकाशन, चित्तौड़गढ़ ने भी अपने स्टॉल लगाकर सहभागिता निभाई

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