
अजीत मिश्रा (खोजी)
विशेष रिपोर्ट: बस्ती के लालगंज में अपराधियों के हौसले बुलंद, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
- बस्ती का ‘लालगंज’: अपराधियों के लिए पनाहगाह और कानून व्यवस्था पर खड़े होते सवाल
- FIR दर्ज होने के बाद भी लालगंज पुलिस की ‘मेहरबानी’ पर सवाल: रंगदारी के आरोपियों पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
- लालगंज थाना क्षेत्र में अपराध का ग्राफ बढ़ा: 6 महीने में 178 मुकदमे, फिर भी अपराधियों के हौसले बुलंद
बस्ती। जनपद के लालगंज थाना क्षेत्र में अपराध और अपराधियों का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसने स्थानीय व्यापारियों और आम जनता में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। पुलिस की कथित ‘मेहरबानी’ और ढुलमुल रवैये के चलते नामजद आरोपी कानून की गिरफ्त से दूर खुलेआम घूम रहे हैं, जो सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की साख पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।क्या कानून का डर लालगंज पुलिस के लिए केवल एक किताबी शब्द बनकर रह गया है? यह सवाल आज हर उस व्यापारी और आम नागरिक के मन में है, जो लालगंज थाना क्षेत्र की बदहाल स्थिति को देख रहा है। खबर के अनुसार, वर्ष 2026 के मात्र छह महीनों में 178 मुकदमे दर्ज होना इस क्षेत्र की बिगड़ती कानून व्यवस्था का जीता-जागता सबूत है।
असलहे के दम पर रंगदारी और दबंगई
मामला लालगंज थाना क्षेत्र के महादेवा का है, जहाँ अपराध की पराकाष्ठा देखने को मिली है। उपलब्ध साक्ष्य के अनुसार, अश्वनी कुमार उर्फ सोनू (निवासी महादेवा) की ओर से दी गई तहरीर पर पुलिस ने विनय पाल, लोरिक पाण्डेय, अमन उपाध्याय तथा अन्य तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
आरोप है कि 25 जून 2026 को इन लोगों ने एक राय होकर वादी के घर में घुसकर उनके पिता के ऊपर असलहा तान दिया। न केवल 5,000 रुपये की रंगदारी की मांग की गई, बल्कि गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी गई। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि अपराधियों को अब कानून या पुलिस का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है।
मुकदमा दर्ज कराने में भी हुई थी जद्दोजहद
व्यापारियों का आरोप है कि पुलिस का नकारात्मक रवैया मुकदमा दर्ज होने से पहले ही शुरू हो गया था। स्थानीय थानेदार शुरुआत में मुकदमा लिखने से कतराते रहे, जिससे अपराधियों का मनोबल और बढ़ गया। अंततः जब व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने पुलिस कप्तान (एसपी) से मिलकर शिकायत की, तब जाकर कहीं एफआईआर (FIR) दर्ज हो सकी।हालिया मामला रोंगटे खड़े करने वाला है। महादेवा में असलहे की नोक पर 5000 रुपये की रंगदारी मांगने, घर में घुसकर दबंगई करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोपों में नामजद आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि मुकदमा दर्ज होने के एक सप्ताह बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। क्या यह पुलिस की विफलता है या किसी के रसूख का दबाव?
आंकड़े बयां कर रहे क्षेत्र का ‘जंगलराज’
दर्ज विवरण के मुताबिक, लालगंज थाना क्षेत्र में अपराध नियंत्रण पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वर्ष 2026 के शुरुआती मात्र छह महीनों में ही यहाँ 178 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के कुख्यात अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
लालगंज में बिगड़ती कानून-व्यवस्था: 6 महीने में 178 मुकदमों का रिकॉर्ड
लालगंज थाना क्षेत्र में अपराध का ग्राफ एक चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया है, जहाँ पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 के मात्र छह महीनों के भीतर इस थाना क्षेत्र में कुल 178 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
अपराधों का बढ़ता दायरा
- क्षेत्र की स्थिति: क्षेत्र में अपराधों की बढ़ती संख्या के कारण कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण बनाए रखना एसओ (थानेदार) के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
- पुलिस का खौफ नदारद: स्थानीय स्तर पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें पुलिस का कोई भय नहीं रह गया है।
- जटिलता: लालगंज क्षेत्र के बारे में यह माना जाने लगा है कि यहां के कुख्यात अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हैं और क्षेत्र का माहौल अशांत हो गया है।
पुलिस की ‘मेहरबानी’ और विवाद
- मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी: स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि पुलिस शुरुआत से ही गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने से बचती रही है।
- दबाव में कार्यप्रणाली: पुलिस पर अक्सर दबाव में काम करने के आरोप लगते हैं, जिससे विभाग की छवि प्रभावित होती है और जनता का भरोसा कम होता है।
- गिरफ्तारी में सुस्ती: रंगदारी और धमकी जैसे गंभीर मामलों में भी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
महादेवा की हालिया घटना: एक उदाहरण
इस क्षेत्र में बढ़ते अपराध का ताजा उदाहरण ‘महादेवा’ की घटना है, जहाँ अपराधियों ने असलहे की नोक पर 5,000 रुपये की रंगदारी की मांग की। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी उसके घर में जबरन घुस गए, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। हालांकि, पुलिस कप्तान के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा तो दर्ज हुआ, लेकिन घटना के एक सप्ताह बाद भी नामजद आरोपी कानून की गिरफ्त से दूर हैं।
यह स्थिति न केवल व्यापारियों के लिए एक बड़ा संकट है, बल्कि क्षेत्र के आम नागरिकों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का पुलिस प्रशासन के प्रति आक्रोश और बढ़ सकता है।
कार्रवाई क्यों नहीं? उठ रहे सवाल
घटना के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
- रसूख का दबाव: क्या नामजद आरोपी किसी रसूखदार के संरक्षण में हैं, जिसके कारण पुलिस उन पर हाथ डालने से बच रही है?
- थानेदार की कार्यशैली: क्षेत्र के व्यापारी थानेदार की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। क्या पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है?
- सुरक्षा का संकट: यदि घर में घुसकर असलहा तानने वाले आरोपी गिरफ्तार नहीं होंगे, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा?
व्यापारियों की चेतावनी: न्याय नहीं तो आंदोलन
इस घटना को लेकर व्यापारियों में भारी रोष है। लालगंज के व्यापारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनका कहना है कि यदि पुलिस ने अविलंब नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा और कानून व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर पीड़ित को न्याय दिलाएंगे या फिर लालगंज में अपराधियों का ‘आंतक’ इसी तरह कायम रहेगा।

















