
कजली मेले में सजा दंगल, पहलवानों ने आजमाए दांव-पेंच
कालपी-जालौन
बुंदेलखंड की लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कजली महोत्सव के अवसर पर ग्राम मटरा में पारंपरिक दंगल का आयोजन किया गया। दंगल में क्षेत्र के नामी पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपने दांव-पेंच आजमाए। कुश्ती देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुटी और दर्शकों ने तालियां बजाकर पहलवानों का उत्साहवर्धन किया।
दंगल की सबसे रोमांचक कुश्ती छोटू पहलवान मटरा और कल्लू पहलवान कीरतपुर के बीच हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश बाबू श्रीवास्तव ने दोनों पहलवानों को अखाड़े में मिलवाकर मुकाबले का शुभारंभ कराया। दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए कई दांव-पेंच आजमाए, लेकिन निर्धारित समय तक कोई भी निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सका। अंततः मुकाबला बराबरी पर छूटा।
इसके अलावा गंभीर सिंह यादव और छोटू द्विवेदी के बीच हुई कुश्ती भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। दोनों पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी।
दंगल में ग्राम प्रधान बालकदास अहिरवार, पूर्व प्रधान लक्ष्मण शरण द्विवेदी, जयसिंह यादव, किशोरलाल, रामाधार द्विवेदी, अशर्फीलाल सविता, श्रीकांत द्विवेदी, नारायण दास द्विवेदी, गफूर अहमद, काशीराम अहिरवार, डॉ. रघुनाथ रेड्डी, ई. सतीश श्रीवास्तव, गणेश प्रसाद शुक्ल, बड़े लाला सक्सेना, प्रवीण श्रीवास्तव, हिमांशु श्रीवास्तव, दीनदयाल प्रजापति, सुख सागर सविता, श्रीबाबू सविता, रामसेवक अहिरवार, चन्द्रभान अहिरवार, पहलवान संतराम यादव, माधव यादव तथा लालता प्रसाद यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश बाबू श्रीवास्तव ने निर्णायक की भूमिका निभाई। ग्राम प्रधान बालकदास अहिरवार ने दंगल में शामिल पहलवानों को सम्मानजनक धनराशि प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में अधिवक्ता विमलेश कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों, पहलवानों और ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कुआंखेड़ा में भी हर्षोल्लास से मनाया गया रक्षाबंधन
कालपी जालौन
कदौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत कुआंखेड़ा में रक्षाबंधन का पारंपरिक एवं ऐतिहासिक पर्व हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख-समृद्धि की कामना की। बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य अकबरपुर-इटौरा अतर सिंह पाल ने अपने निज निवास पर बहनों से राखी बंधवाई तथा झूला झूलकर पारंपरिक पर्व का आनंद लिया।
इस दौरान गांव में बुंदेलखंड की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। बच्चों ने कुश्ती में अपने दांव-पेंच आजमाए। ग्रामीणों ने कहा कि कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है तथा शरीर स्वस्थ और फुर्तीला रहता है।रक्षाबंधन के अवसर पर ग्रामीणों ने एक-दूसरे के घर जाकर कजली दी और आत्मीयता के साथ मुलाकात की। इस दौरान आपसी गिले-शिकवे दूर कर भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने का संदेश दिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि बुंदेलखंड के पारंपरिक त्योहार हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। इन्हें प्रेम, शालीनता और मधुरता के साथ मनाने से सामाजिक एकता और आपसी भाईचारा मजबूत होता है।
जिला संवाददाता
सीपेंद्र सिंह





