खलीलाबाद हाईवे पर होटल या अय्याशी का अड्डा? पुलिस की दबिश में बेनकाब हुआ सच
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨एनएच-27 के किनारे ‘होटल संस्कृति’ की आड़ में पनपते अवैध धंधे: खाकी की दबिश से हड़कंप, पर सवाल सुरक्षा व्यवस्था पर🚨
👉 एनएच-27 के होटलों में संदिग्ध गतिविधियों का बोलबाला: पुलिस छापे में 5 गिरफ्तार, वैधता पर उठे सवाल
👉 खाकी के सामने ही उग्र हुए होटल मालिक और कर्मचारी, बुलंद हौसलों के पीछे आखिर किसका हाथ? 👉 संत कबीर नगर: 'होटल ग्रीन एण्ड रेस्टोरेन्ट' पर पुलिस का छापा, 5 हिरासत में, दस्तावेजों की होगी जांच
👉 हाईवे के किनारे फल-फूल रहा अवैध धंधा: प्रशासन की नाक के नीचे कैसे चल रहे ये संदिग्ध ठिकाने?
बस्ती: संत कबीर नगर जनपद के खलीलाबाद क्षेत्र में एनएच-27 के किनारे खुलेआम फलफूल रहे ‘होटल और रेस्टोरेंट’ अब राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा और सामाजिक मर्यादा के लिए एक गंभीर नासूर बनते जा रहे हैं। हाल ही में सेमरा स्थित ‘होटल ग्रीन एण्ड रेस्टोरेन्ट’ में पुलिस की दबिश और उसके बाद सामने आए हालात ने इस कड़वी सच्चाई को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है कि किस तरह इन तथाकथित आशियानों की आड़ में संदिग्ध गतिविधियों का बाजार गर्म है।
सवाल यह है कि आखिर इस तरह के ठिकाने लंबे समय तक प्रशासनिक नजरों से ओझल कैसे रहते हैं? घटना के दिन जब पुलिस टीम महिलाओं और युवतियों के अनाधिकृत आवागमन तथा बाहरी युवकों की संदिग्ध मौजूदगी की पुख्ता सूचना पर मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा प्रशासनिक निष्क्रियता और कानून के खौफ की कमी पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करने वाला था।
होटल के मालिक, कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय खाकी के सामने ही उग्र तेवर दिखाने और विवाद की स्थिति पैदा करने का दुस्साहस किया। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इनके हौसले कितने बुलंद थे और इन्हें स्थानीय स्तर पर किस तरह की शह मिल रही थी।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गोरखपुर, कुशीनगर और स्थानीय क्षेत्र के रहने वाले चन्द्रकेतु सिंह, अखण्ड प्रताप सिंह, अंकुश प्रजापति, आलोक भट्ट और हरजीत मौर्या जैसे तत्वों को हिरासत में तो ले लिया है और कानूनी शिकंजा भी कसा है, लेकिन यह कार्रवाई महज एक बानगी भर नहीं होनी चाहिए। अब प्रशासन द्वारा होटल के दस्तावेजों और उसकी वैधता की जांच के लिए उप जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो कि एक आवश्यक कदम है।
परंतु जनता के जेहन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह इकलौता होटल है जो नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहा था? एनएच-27 के किनारे ऐसे अनगिनत ठिकाने और तथाकथित रेस्टोरेंट मौजूद हैं जहां दूर-दराज के जिलों से असामाजिक तत्वों का आना-जाना आम बात हो चुकी है।
क्या स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन को इन गतिविधियों की भनक तब तक नहीं लगती जब तक मामला हंगामे या किसी बड़ी अनहोनी की कगार तक न पहुंच जाए? यदि खलीलाबाद और उसके आसपास के इलाकों को अपराध और अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बनने से बचाना है, तो केवल कुछ चेहरों की गिरफ्तारी और कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।
जरूरत इस बात की है कि राजमार्ग के किनारे संचालित होने वाले प्रत्येक होटल, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट की गहराई से जांच हो, उनके वैध-अवैध होने का कच्चा चिट्ठा खंगाला जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ऐसी दृष्टांत स्वरूप कार्रवाई हो कि दोबारा कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके। जब तक प्रशासन का बुलडोजर और कानून का डंडा इन अवैध अड्डों की जड़ों पर पूरी ताकत से नहीं बरसेगा, तब तक ऐसे छापों से केवल कुछ समय के लिए हड़कंप मचेगा और अपराधी नए ठिकाने तलाश लेंगे।













