
बलिया । गोपालनगर (दियरांचल) स्थित सरयू नदी के सीमावर्ती गाँवो को रिंग बांध का निर्माण कर बाढ़ की कटान व प्रति वर्ष सैकड़ो घर और सैकड़ो एकड़ उपजाऊ जमीन को सरयू व गंगा नफीनिगल रही है।यहाँ की जनता वर्षो से बाढ़ व कटान से अपनी बर्बादी दंश झेल रही है।प्रदेश की सरकार बैरिया की जनता को बाढ़ कटान से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए। उक्त बातें बैरिया विधायक जयप्रकाश अंचल के है जो मंगलवार की देर शाम गोपालनगर ( टांडी ) में सरयू नदी के भयंकर कटान से बर्बादी हो चुके पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद काफी द्रवित अंदाज में मीडिया से रूबरू थे । उन्होंने कहा कि वर्षो से मैं शासन और प्रशासन दोनों से अपील करता रहा हूं कि समय से पूर्व बाढ़ के कटान से नागरिकों को बचाने के लिये कुछ न कुछ उपाय किया जाय, परन्तु किसी ने इस पर ध्यान नही दिया।आज स्थित इतनी भयावह है कि लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक रिहाइसी मकान और सैकड़ों एकड़ जमीन नदी के गर्भ में समा गये है। जिस तरह से कटान ने अपना रुख अख्तियार किया है उससे अभी कई गांव और सैकडों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो सकते हैं। क्योंकि अभी बाढ़ का असली तांडव तो आगे आने वाला है । विधायक ने कहा कि एक ओर नदी में समाये घर और जमीन तो दूसरी ओर खुले आसमान के नीचे बरसात की मार झेलने वाले पीड़ित परिवारों पर क्या गुजर रही है इससे शासन और प्रशासन दोनों बेफ्रिक है।कहा कि अभी तक कटान पीडितों को किसी भी प्रकार की मदद नहीं पहुचाई जा सकी है।यही नही,पिछले वर्षों में बाढ़ की कटान में समाहित घरों के पीड़ित अनेक परिवारों को अभी तक न भूमि का आवंटन हुआ और न ही आपदा आवास का निर्माण कराया जा सका है । उन्होंने जोर देकर कहा कि हर वर्ष बाढ़ की आफत और विपत्ति का सिर्फ एक ही समाधान है कि सरकार दर्जनों गांव और हजारों नागरिकों की स्थायी सुरक्षा हेतु रिंग बांध का निर्माण कराये । अंचल ने कहा कि इस विषय की मांग हम विधानसभा में पहले भी रखे है और अब भी जोर देकर रखेगें । कटान स्थल पर अपरजिलाधिकारी , उपजिलाधिकारी बैरिया , नायब तहसीलदार तथा सिचाई विभाग के एस डी ओ अमृतलाल से जब पूछा गया कि इस भयंकर कटान को रोकने के लिये प्रशासन क्या उपाय कर रहा है तो उनका जबाब था कि कटान की परिधि 5-6 किलोमीटर के दायरे में है ऐसी स्थिति में क्या उपाय किया जा सकता है ।
उल्लेखनीय है कि नदी के तेज कटान में अबतक मुसाफिर यादव, परशुराम यादव, सुरेन्द्र , रामनाथ, दूधनाथ, शिवनारायण यादव,बबन यादव, यशोदा नन्द ,रामविचार, रामखेलावन, धर्मराज, प्रभु यादव तथा पूर्व प्रधान बच्चा यादव आदि लगभ डेढ़ दर्ज़न से अधिक रिहाइसी मकान और पच्चासो एकड़ खेत नदी में समाहित हो चुके है । नदी की तीव्र कटान को देखते हुए ग्रामीण अपने पक्के मकानों को पहले से ही तोड़ कर ईट और घर का समान ढोने में लगे हुऐ है ।

