?php echo do_shortcode('[t4b-ticker]'); ?
A2Z सभी खबर सभी जिले कीपंजाब

पंजाब पुलिस ने तरनतारन सेवा केंद्र से चल रहे फर्जी हथियार लाइसेंस रैकेट का किया भंडाफोड़ ; छह फर्जी हथियार लाइसेंसधारकों समेत आठ गिरफ्तार

35457167 fa23 4b95 8f4c 9a0541c69366

 

*पुलिस टीमों ने छह फर्जी हथियार लाइसेंस, सात हथियार और फर्जी दस्तावेजों के विवरण वाला एक लैपटॉप किया बरामद*

*मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशानुसार पंजाब पुलिस राज्य से संगठित अपराध को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध*

*संदिग्ध गन हाउसों की भूमिका की भी होगी जांच: डीजीपी गौरव यादव*

*सेवा केंद्र के जिला मैनेजर प्रमुख सरगना; आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है: सीपी अमृतसर रंजीत ढिल्लों*

 

पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य में संगठित अपराध को खत्म करने के अभियान के दौरान अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने फर्जी हथियार लाइसेंस बनाने वाले गिरोह के दो सदस्यों और छह फर्जी हथियार लाइसेंस धारकों को गिरफ्तार कर इस रैकेट का भंडाफोड़ करने में सफलता हासिल की है। यह जानकारी आज यहां पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने दी।
यह रैकेट तरनतारन सेवा केंद्र के जिला मैनजर सूरज भंडारी जो अब फरार है कि मिलीभगत से चलाया जा रहा था।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि गिरफ्तार गिरोह के सदस्यों में तरनतारन सेवा केंद्र का कर्मचारी हरपाल सिंह और एक फोटोस्टेट दुकान का मालिक बलजीत सिंह जिसने फर्जी हथियार लाइसेंस बनाने के लिए आधार कार्ड और हथियार लाइसेंस प्रोफार्मा सहित आवश्यक पहचान दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने की बात
स्वीकार की है, शामिल है। पुलिस टीमों ने लैपटॉप भी बरामद किया है, जिसमें अलग-अलग संपादित
दस्तावेजों के विवरण व दस्तावेजों में हेरफेर करने के लिए उपयोग किए जाने वाले ऑनलाइन ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर भी शामिल हैं।
इस रैकेट का भंडाफोड़ 9 अप्रैल, 2024 को इरादा कत्ल मामले में गिरफ्तार किए अन्नगढ़ के बबलू उर्फ बल्लू जिसने पूछताछ के दौरान सह-आरोपी कंवरदीप सिंह के साथ नकली लाइसेंसी आग्नेयास्त्र रखने की बात कबूल की थी, से मिली जानकारी के बाद हुआ।
डीजीपी ने बताया कि आरोपी बल्लू के खुलासे के बाद एडीसीपी जोन-1 डाॅ. दर्पण आहलूवालिया और एसीपी सेंट्रल सुरिंदर सिंह की देखरेख में थाना गेट हकीमा से टीमों ने जांच शुरू की और पाया कि हथियार लाइसेंस डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तरनतारन से का सत्यापन किया गया था, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा कि तरनतारन के लोगों के अलावा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अमृतसर के निवासी भी फर्जी आधार कार्ड के आधार पर तरनतारन से फर्जी लाइसेंस बना रहे थे।
डीजीपी गौरव यादव ने गन हाउसों की मिलीभगत से इनकार न करते हुए कहा कि पुलिस टीमें ऐसे गन हाउसों की भूमिका की जांच कर रही हैं, जिन्होंने फर्जी लाइसेंस होने की जानकारी होने के बावजूद ऑनलाइन सत्यापन के बिना हथियार बेचे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आगे की जांच जारी है।
अधिक जानकारी साझा करते हुए, पुलिस कमिश्नर (सीपी) अमृतसर रणजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि 11 जून, 2024 को एक एफआईआर दर्ज की गई थी और पांच और फर्जी हथियार लाइसेंसधारियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अभय निवासी सुल्तानविंड को फर्जी तौर पर
जंडियाला रोड, तरनतारन का निवासी दिखाया गया है, इसी तरह अमृतसर के मनप्रीत को तरनतारन का निवासी दिखाया गया है, अमृतसर के कंवरदीप को रेलवे रोड, तरनतारन का निवासी दिखाया गया है और अमृतसर के रोहित को तरनतारन के गांव कंग का निवासी दिखाया गया है, को 12 जून 2024 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि सदर तरनतारन के रहने वाले हरिंदर को 2 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने बताया कि पुलिस टीमों ने उनके कब्जे से 6 फर्जी हथियार लाइसेंस, फर्जी आधार कार्ड और .32 बोर की 4 पिस्तौल, .32 बोर की 2 रिवॉल्वर और 1 डबल बैरल राइफल सहित 7 हथियार भी बरामद किए हैं।
सीपी ने बताया कि गिरोह का सरगना सूरज भंडारी असलहा लाइसेंस बनाने के लिए प्रति ग्राहक 1.5 लाख रुपए की फीस ले रहा था, जिसमें से 5-10 हजार रुपए का कमीशन आरोपी फोटोस्टेट दुकान मालिक बलजीत को दिया जाता था जबकि सर्विस केंद्र के कर्मचारी हरपाल को 10-20 हजार रुपए मिल रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि वे क्यूआर कोड, होलोग्राम, स्टांप और डिजिटल हस्ताक्षर के साथ छेड़छाड़ करते थे। उन्होंने बताया कि आरोपी सूरज भंडारी को पकड़ने के लिए पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं।
इस संबंध में एफआईआर नं. 101 तिथि 11/6/24 को थाना गेट हकीमा में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 417, 420, 177, 465, 467, 469, 471 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया था।6e7f7434 e3f8 4bb5 8862 9230ffb7099a

 

Back to top button
error: Content is protected !!