
बढ़ती हुई जनसंख्या स्वस्थ समाज के लिए खतरा-शिवानी जैन एडवोकेट

ऑल ह्यूमन सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन डिस्टिक वूमेन चीफ शिवानी जैन एडवोकेट ने कहा कि
विश्व जनसंख्या दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है जो हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य न केवल बढ़ती जनसंख्या और समाज, राष्ट्र और पर्यावरण पर इसके प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाना है, बल्कि इसे नियंत्रित करने के लिए जनता को शिक्षित करना भी है।
यह दिवस तब अस्तित्व में आया जब 1987 में विश्व की जनसंख्या 500 करोड़ तक पहुंच गई, जिसका उद्देश्य जनहित को संबोधित करना तथा लोगों को जनसंख्या से जुड़े मुद्दों जैसे परिवार नियोजन के लाभ, लैंगिक समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य, मानवाधिकार आदि के बारे में शिक्षित करना था।
थिंक मानवाधिकार संगठन एडवाइजरी बोर्ड मेंबर डॉ कंचन जैन ने कहा कि पिछले तीस वर्षों में, दुनिया भर के देशों ने जनसांख्यिकीय डेटा संग्रह, विश्लेषण और उपयोग में जबरदस्त प्रगति की है। आयु, जातीयता, लिंग और अन्य मानदंडों के आधार पर अलग-अलग किए गए नए जनसंख्या अनुमान हमारे समाज की विविधता को अधिक सटीक रूप से दर्शाते हैं।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक
डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, संरक्षक आलोक मित्तल एडवोकेट, ज्ञानेंद्र चौधरी एडवोकेट, बृजेश शुक्ला एडवोकेट, राकेश दक्ष एडवोकेट, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी, शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, बीना एडवोकेट ने कहा कि दुनिया की बढ़ती आबादी मानव अस्तित्व के लिए खतरा बनती जा रही है। 2017 में दुनिया की आबादी करीब 700 करोड़ थी, इस साल यानी 2024 में यह 810 करोड़ बताई जा रही है। बढ़ती आबादी की वजह से दुनिया के प्राकृतिक संसाधन हर दिन बेहद कम होते जा रहे हैं।इसलिए, स्वस्थ समाज के लिए खतरे को रोकने और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर और टिकाऊ भविष्य प्रदान करने के लिए, जागरूकता पैदा करना और लोगों को अधिक जनसंख्या से जुड़े जोखिम के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है।
शिवानी जैन एडवोकेट
डिस्ट्रिक्ट वूमेन चीफ

