
पीलीभीत: जनपद पीलीभीत में स्थित मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र को जनहित सेवा समिति ने गोद लेने का फैसला लिया है। यह आश्रय गृह कई वर्षों से कुलविंदर जी निवासी उदयकरनपुर की अध्यक्षता में संचालित हो रहा था, जिसमें समाज सेवी योगदान कर रहे थे। इसके बाद आश्रम के अध्यक्ष द्वारा आग्रह पर जनहित सेवा समिति के अध्यक्ष आशीष तिवारी ने सोमवार को आश्रम का दौरा किया और सारी व्यवस्थाएं देखीं। इसके बाद उन्होंने आश्रय गृह को गोद लेने का ऐलान किया और कहा कि समिति अब आश्रम की देखरेख करेगी और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करेगी।
आश्रम के अध्यक्ष कुलविंदर जी ने जनहित सेवा समिति ने को सारी जानकारियां दीं और कहा कि यह फैसला बच्चों के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जनहित सेवा समिति का आभार व्यक्त किया। जनहित सेवा समिति की इस पहल की लोगों द्वारा सराहना की जा रही है। लोगों ने कहा कि यह फैसला आश्रय गृह में रहने वाले बच्चों के जीवन में नई उम्मीद लाएगा।आश्रम में रहने वाले बच्चों ने भी अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि वे अपने भविष्य के लिए आशान्वित हैं। जनहित सेवा समिति के सदस्यों ने आश्रम में रहने वाले बच्चों से बातचीत की और उनकी जरूरतों को समझने का प्रयास किया। इस फैसले से आश्रय गृह में रहने वाले बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। जनहित सेवा समिति ने आश्रम के विकास के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। दौरे के दौरान आश्रय केंद्र पर आश्रय गृह केंद्र के अध्यक्ष कुलविंदर सिंह के साथ जनहित सेवा समिति के अध्यक्ष आशीष तिवारी के द्वारा संस्था के कई लोग मौजूद रहे और कई निर्णय लिए गए। जिसमें मुख्य रूप से जनहित सेवा समिति के अध्यक्ष आशीष तिवारी जी, राजेश, सपा नेता तौफीक अहमद कादरी, संदीप ठाकुर, मोहम्मद अहमद फौजी, जगजीत सिंह प्रधान, हरिराम वर्मा, नरेंद्र कुमार मौजूद रहे।
अनाथ आश्रम पूरनपुर में अनाथ बच्चों को रखा जा रहा है, जहां पर सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सभी त्योहारों पर समाजसेवीयो के द्वारा बच्चों के बीच पहुंचकर खाने की वस्तुएं प्रदान की। आश्रम को अन्य सामान प्रदान किया गया। बच्चों से मुलाकात कर हालचाल जाना गया। बच्चों में काफी उत्साह देखा जाता है
अनाथालय एक आवासीय संस्थान , कुल संस्थान या समूह घर है , जो अनाथों और बच्चों की देखभाल के लिए समर्पित है , जो विभिन्न कारणों से, अपने जैविक परिवारों द्वारा देखभाल नहीं की जा सकती हैं। माता-पिता मृत, अनुपस्थित या दुर्व्यवहार कर सकते हैं। जैविक घर में मादक द्रव्यों के सेवन या मानसिक बीमारी हो सकती है, या माता-पिता बस बच्चे की देखभाल करने के लिए तैयार नहीं हो सकते हैं। अब यह आम तौर पर स्वीकार किया जाता है।







