इटवा में संघ के जिलाध्यक्ष के बर्खास्त पर भड़के लेखपाल
प्रशासन के लिए खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
इटवा में प्रशासन के रवैये के खिलाफ लेखपाल संघ ने तीन दिन से ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार करने के बाद अब जिले की सभी तहसीलों पर धरना-प्रदर्शन करने का एलान किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो वे जिला, मंडल और प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रशासन पर लेखपालों का उत्पीड़न करने का आरोप
इटवा तहसील में बुधवार को लेखपाल संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें संगठन के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष रणधीर यादव ने प्रशासन पर लेखपालों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अभी तक ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार किया जा रहा था, लेकिन अब से बृहस्पतिवार से सभी तहसीलों में धरना-प्रदर्शन शुरू होगा। 1 दिसंबर को प्रदेश स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है। संगठन ने स्पष्ट किया कि अगर 2 दिसंबर से जिला स्तर पर आंदोलन नहीं रोका गया, तो इसके बाद मंडल और प्रदेश स्तर पर भी आंदोलन किया जाएगा।
निलंबन को लेकर आक्रोषित लेखपाल
संगठन के जिला मंत्री आनंद गौतम ने अजय गुप्ता, जो कि संघ के जिलाध्यक्ष थे, की बर्खास्तगी को नियम के खिलाफ और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी वैध कारण के संगठन के जिलाध्यक्ष को बर्खास्त कर दिया और इस कदम से लेखपालों में गुस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि लेखपालों की गांव और किसानों से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है।
मांग को लेकर होगा आंदोलन
इटवा तहसील मंत्री नवीन चौधरी ने भी प्रशासन के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि लेखपालों का उत्पीड़न बर्दाश्त से बाहर हो चुका है, और अब संगठन आर-पार के आंदोलन की रणनीति पर काम कर रहा है।1 दिसंबर को प्रदेश स्तरीय बैठक होगी। 2 दिसंबर से जिला स्तर पर आंदोलन शुरू होगा इसके बाद मंडल और प्रदेश स्तर पर भी आंदोलन किया जाएगा।
कार्य न करने का ऐलान किया
संगठन ने आंदोलन के दौरान कोई कार्य नहीं करने का ऐलान किया है और प्रशासन से मांग की है कि लेखपालों के उत्पीड़न को रोका जाए, और अजय गुप्ता की बर्खास्तगी को वापस लिया जाए। इस दौरान तहसील अध्यक्ष अमरदीप चौधरी, सूर्य प्रकाश राजकमार कन्नौजिया अर्जन मौर्या दीपक मौर्याअभिषेक, ज्योति, पूनम मिश्रा, सुधीर, दीनानाथ, पन्नालाल, अनूप और अन्य बड़ी संख्या में लेखपालों की उपस्थिति रही।



