जी के लिए कमाने गए आदिवासी मजदूर की उपचार के बगैर मौत।
सीधी। जिले में भले ही सत्ता पक्ष के नेता गला फाड़ कर गरीब मजदूरों को रोजगार दिलाने की बात क्यों ना करते हो लेकिन दिन-ब-दिन जा रही आदिवासी मजदूर की जान इस चीज की साक्षी बनी हुई है कि अभी भी सीधी जिले में बेरोजगारी और बदहाली का दौर जारी है।
ताजा मामला सीधी जिले के ग्राम सोन तीर पटेहरा का है
परिजनों ने जानकारी देते हुए बताया कि मेरा भतीजा मुनेश कोल जीविकोपार्जन के लिए कमाने मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के के कंट्रक्शन कंपनी में गया हुआ था जहां एक्सीडेंट हो गया और उपचार के लिए दर्द से कराहता रहा बार-बार मजदूर के सगे संबंधियों द्वारा कंपनी के आला अधिकारियों को दूर संचार से संपर्क किया जा रहा था लेकिन कंपनी के अधिकारी फोन उठाने को तैयार नहीं थे डॉक्टर उक्त मजदूर को भोपाल के लिए रेफर कर दिए थे लेकिन बदहाली की बात यह रही कि साथी मजदूरों के पास ना तो उपचार के लिए पैसा थे ना ही भोपाल ले जाने के लिए और दर्द से करता मजदूर अंततः दम तोड़ दिया।
जिस मजदूर की डेड बॉडी कल ग्रह ग्राम में लाई गई जहां अर्थी पहुंचते ही परिवार जनों में मातम पसर गया समूचे गांव में सन्नाटा छा गया गांव के सरपंच पति हरदम ही इन मजदूरों के मसीहा रहे हैं जो इनके दुख की घड़ी में शामिल होते हुए पूरी मदद की साथ ही सहायता राशि भी दिए हैं।
अब सवाल यह उठता है की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला जिनके हाथों में विंध्य क्षेत्र की कमान भाजपा के शीर्ष नेताओं ने सौंपा है तो क्या अब विंध्य क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार मुहैया करा पाएंगे
या इसी तरह मजदूरों की जान जाती रहेगी आखिरकार जनता से कितना झूंठे वादे करते रहेंगे डिप्टी सीएम।



