

सहारनपुर स्मार्ट सिटी परियोजना में बड़ा घोटाला! वॉल पेंटिंग और विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी?
सहारनपुर: स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर को आधुनिक और खूबसूरत बनाने के वादे किए गए थे, लेकिन अब यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। शहर में लगाए गए वेलकम बोर्ड जर्जर हो चुके हैं, दीवारों पर की गई पेंटिंग गायब हो रही हैं और कई प्रमुख परियोजनाएँ अधर में लटकी हैं। स्थानीय लोग अब खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपये की राशि कहाँ गई?
कहां गया स्मार्ट सिटी का पैसा?
स्मार्ट सिटी योजना के तहत सहारनपुर में वॉल पेंटिंग, सड़कों के सौंदर्यीकरण, पुल निर्माण और रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट जैसे बड़े कार्य किए जाने थे। लेकिन हकीकत यह है कि कई स्थानों पर घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ, जिससे ये संरचनाएं कुछ ही महीनों में जर्जर हो गईं।
- वेलकम बोर्ड और साइनेज्स— कई स्थानों पर लगाए गए वेलकम बोर्ड टूट चुके हैं, कुछ जगहों पर बोर्ड गायब हैं।
- वॉल पेंटिंग— पेंटिंग के लिए आवंटित राशि तो खर्च कर दी गई, लेकिन अधिकतर पेंटिंग फीकी पड़ चुकी हैं या खराब हो गई हैं।
- रिवरफ्रंट डेवलपमेंट— धमोला नदी के किनारे रिवरफ्रंट बनने की योजना थी, जिससे शहर को एक नया आकर्षण मिलता, लेकिन यह प्रोजेक्ट अब तक अधूरा है।
- राकेश टॉकीज पुल— इस पुल का निर्माण भी धीमी गति से चल रहा है, जिससे जनता को असुविधा हो रही है।
भ्रष्टाचार के आरोप, प्रशासन पर सवाल
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर अधिकारियों और ठेकेदारों ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। घटिया सामग्री और लापरवाह निर्माण कार्यों की वजह से ये प्रोजेक्ट असफल साबित हो रहे हैं।
शहर के कुछ व्यापारियों और नागरिकों ने सरकार से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोग चाहते हैं कि इस घोटाले की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
जनता में रोष, जांच की उठी मांग
स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। स्थानीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पारदर्शिता नहीं लाई गई और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
प्रशासन की चुप्पी, सवालों के घेरे में अधिकारी
अब तक सहारनपुर नगर निगम या स्मार्ट सिटी परियोजना के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस बयान नहीं आया है। क्या प्रशासन इस घोटाले की जांच करवाएगा या फिर यह मामला भी दूसरे घोटालों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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