
समीर वानखेड़े:
वन विभाग के विश्वसनीय सूत्रों से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि पिछले चार महीनों में म्यांमार के रास्ते भारत से चीन तक कम से कम 15 बाघों की तस्करी की गई है। यह चौंकाने वाला खुलासा मिजोरम के एक आरोपी जामखानकाप की गिरफ्तारी के बाद हुआ, जो बाघ के शिकार के बदले बहेलिया गिरोह को पैसा मुहैया करा रहा था।
लगभग एक दशक के बाद मध्य भारत में बाघ एक बार फिर शिकारियों के निशाने पर आ गए हैं और अब यह बात सामने आ रही है कि इन शिकारियों ने बड़े पैमाने पर बाघों की हत्या की है। बहेलिया जनजाति के सदस्य अजीत राजगोंड को जनवरी में चंद्रपुर जिले के राजुरा तालुका से गिरफ्तार किया गया था, और इसने देश भर के बाघ प्रेमियों को चौंका दिया है। ठीक एक दशक पहले बाघों के शिकार के लिए कुख्यात इन्हीं बहेलिया और बावरिया समूहों ने विदर्भ और मध्य भारत में बड़े पैमाने पर बाघों का शिकार किया था।
वन विभाग की विशेष जांच टीम ने बाघों के शिकार के लिए कुख्यात अजीत राजगोंड की गिरफ्तारी के मामले में शिकारी गिरोह के इस अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा किया है। यह खुलासा हुआ है कि पूर्वोत्तर राज्यों मिजोरम और मेघालय से गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी जामखानकाप, निंग सान लून और लालनेइसांग म्यांमार के रास्ते चीन में बाघों की तस्करी कर रहे थे।
पूर्वोत्तर राज्य से गिरफ्तार तीन आरोपियों से पूछताछ के बाद सूत्रों ने खुलासा किया है कि चीन में तस्करी कर लाए गए सभी बाघ मध्य प्रदेश और विदर्भ से हैं।
हालांकि, यह सवाल बहुत गंभीर है कि वन विभाग सबसे उन्नत तकनीक, कुशल मानव शक्ति और हजारों करोड़ रुपये की धनराशि होने के बावजूद इन शिकारियों को रोकने में सक्षम क्यों नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गुरुवार को न्यायमित्र एडवोकेट सुधीर टोडीटेल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के समक्ष विदर्भ में पिछले 5 वर्षों में 160 बाघों की मौत की ओर ध्यान दिलाया था। इसलिए नागपुर पीठ ने आदेश दिया है कि बाघों की मौत से संबंधित सारी जानकारी अगले तीन सप्ताह के भीतर अदालत में पेश की जाए।









