
हमीरपुर | जिले में खनिज माफियाओं की मिलीभगत और प्रशासन की लापरवाही के चलते करोड़ों की राजस्व हानि हो रही है। झांसी जिले में संचालित मोरम खदान (खरवांच खंड संख्या-03) से अवैध तरीके से मोरम लदे ट्रक हमीरपुर जिले की सीमा से निकाले जा रहे हैं। इसके लिए न केवल प्रशासन की आँखों में धूल झोंकी जा रही है, बल्कि नदी की बीच जलधारा को प्रभावित कर एक अवैध पुल भी बनाया गया है। इस पुल से धड़ल्ले से ट्रक पार किए जा रहे हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि हमीरपुर का राजस्व भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
कैसे चल रहा है यह अवैध खेल?
हमीरपुर जिले की सीमा पर प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरियर और धर्मकांटे का दुरुपयोग कर खनन माफिया बेखौफ होकर झांसी की खदानों से मोरम निकाल रहे हैं। इन ट्रकों की निकासी से झांसी को तो लाभ हो रहा है, लेकिन हमीरपुर को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
अवैध पुल से पर्यावरण को खतरा
मामला केवल राजस्व हानि तक ही सीमित नहीं है। इस अवैध पुल के कारण नदी की जलधारा को भी बाधित किया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो सकता है। जलस्तर में असामान्य बदलाव होने पर भविष्य में बाढ़ या सूखे जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रशासन की चुप्पी क्यों?
जब हमने इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि “जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई होगी।” लेकिन सवाल यह उठता है कि जब यह अवैध काम लंबे समय से जारी है, तो अभी तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोग क्या कहते हैं?
हमीरपुर के एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया,
“हर दिन यहां से दर्जनों ट्रक गुजरते हैं। यह काम कई महीनों से चल रहा है। हमने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर यही हाल रहा, तो हमीरपुर पूरी तरह लूट लिया जाएगा।”
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
निष्कर्ष:
हमीरपुर जिले की खनिज संपदा और राजस्व पर पड़ोस के जिलों की खदानों का अवैध कब्जा किसी घोटाले से कम नहीं। अगर प्रशासन अभी भी जागरूक नहीं हुआ, तो आने वाले समय में न केवल जिले को आर्थिक हानि होगी, बल्कि पर्यावरण भी गंभीर रूप से प्रभावित होगा। क्या सरकार इस मुद्दे पर ध्यान देगी, या फिर यह लूट ऐसे ही जारी रहेगी? अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर क्या कदम उठाते हैं!
(आपकी राय?)
क्या आपको लगता है कि प्रशासन को इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाने चाहिए?






