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शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: कूटरचित दस्तावेजों से प्रधान पाठक बना दिनेश प्रधान, अब तक कार्रवाई नहीं

शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: कूटरचित दस्तावेजों से प्रधान पाठक बना दिनेश प्रधान, अब तक कार्रवाई नहीं

शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: कूटरचित दस्तावेजों से प्रधान पाठक बना दिनेश प्रधान, अब तक कार्रवाई नहीं

तिलक राम पटेल (वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़)महासमुंद। शिक्षा, जो देश का भविष्य संवारती है, उसी शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें गहरी कर चुका है। जिले में वर्ष 2022 में सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक पद पर हुई पदोन्नति में बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें कूटरचित दस्तावेजों के सहारे पदोन्नति का लाभ उठाया गया।

 

फर्जी दस्तावेज बनाकर प्रधान पाठक बना शिक्षक

 

महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम खैरखुटा में पदस्थ प्रधान पाठक दिनेश प्रधान का नाम इस घोटाले में प्रमुख रूप से सामने आया है। यह मामला शिक्षा विभाग में हो रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की पोल खोलता है।

 

सूत्रों के अनुसार, दिनेश प्रधान पहले बसना विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला पितईपाली में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के रूप में पदस्थ थे। बाद में 31 अगस्त 2010 को जनपद पंचायत बसना के आदेश क्रमांक 1105 के तहत स्वयं के व्यय पर पिथौरा विकासखंड के ग्राम खैरखुटा में स्थानांतरित हुए।

 

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

 

जब वर्ष 2022 में सहायक शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हुई, तो दिनेश प्रधान ने अपने स्वयं के व्यय पर हुए स्थानांतरण आदेश में छेड़छाड़ कर उसे प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण दिखाने का फर्जी दस्तावेज तैयार किया और इसी के आधार पर प्रधान पाठक पद की वरिष्ठता सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया।

 

वरिष्ठता सूची में हेरफेर का खेल

 

स्वयं के व्यय पर स्थानांतरण होने पर शिक्षक की वरिष्ठता समाप्त हो जाती है।

 

प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण होने पर वरिष्ठता बनी रहती है।

 

दिनेश प्रधान ने इसी नियम का दुरुपयोग कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किया और अवैध रूप से प्रधान पाठक का पद हासिल कर लिया।

 

 

महत्वपूर्ण तथ्य:

 

✅ बसना जनपद पंचायत के सीईओ के पास एक जनपद से दूसरे जनपद प्रशासनिक स्थानांतरण करने का अधिकार नहीं है। ✅ स्वाभिमान न्यूज़ की पड़ताल में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से प्राप्त दस्तावेजों से दिनेश प्रधान के स्वयं के व्यय पर स्थानांतरित होने का प्रमाण मिला है। ✅ इसके बावजूद, अब तक इस घोटाले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

 

शिकायत के बावजूद शिक्षा विभाग की चुप्पी!

 

इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत एक जागरूक नागरिक द्वारा की गई है, लेकिन शिक्षा विभाग ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

 

जब स्वाभिमान न्यूज़ के प्रतिनिधि ने दिनेश प्रधान से संपर्क किया, तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी देने से इनकार कर दिया।

 

बड़ा सवाल: आखिर दोषी पर कार्रवाई कब होगी?

 

महासमुंद जिले के शिक्षा विभाग में हुए इस घोटाले ने योग्य शिक्षकों के भविष्य को अंधकारमय कर दिया है। यह मामला केवल एक शिक्षक का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की साख पर सवाल खड़ा करता है।

 

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में कोई सख्त कदम उठाएगा, या फिर भ्रष्टाचार की यह गहरी जड़ें यूं ही बनी रहेंगी?


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