
मेरठ के हस्तिनापुर में बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा: मंत्री को लौटाई राहत सामग्री, सुरक्षित रिहायशी प्लॉट्स की मांग पर अड़े ग्रामीण
मेरठ जनपद के हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों का गुस्सा इस बार खुलकर सामने आया जब प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री एवं हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटने पहुंचे। सामान्य तौर पर राहत सामग्री पाकर पीड़ित लोग कुछ हद तक सन्तोष जता देते हैं, लेकिन इस बार ग्रामीणों ने राहत पैकेट लेने से साफ इंकार कर दिया और यहां तक कि मंत्री को सामग्री लौटा दी। ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें बार-बार दी जाने वाली अस्थायी मदद से अब कोई राहत नहीं मिलती, क्योंकि हर साल गंगा के उफान के साथ बाढ़ की वही त्रासदी उनके सिर पर टूटती है, खेत-खलिहान बर्बाद होते हैं, कच्चे मकान ढह जाते हैं और लोग महीनों तक विस्थापित होकर जीवन जीने को मजबूर होते हैं। उनका कहना था कि वे अब केवल तत्कालीन खाद्यान्न या कंबल नहीं चाहते, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था चाहते हैं जिससे उनके जीवन में सुरक्षित बदलाव आ सके। ग्रामीणों ने मंत्री के सामने अपनी मांग रखते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार उन्हें गंगा के किनारे की असुरक्षित जमीन से हटाकर ऊंची एवं सुरक्षित जगहों पर रिहायशी प्लॉट्स उपलब्ध कराए, ताकि वे बार-बार बाढ़ की विभीषिका से बच सकें। लोगों का आरोप है कि मंत्री ने पिछले वर्ष भी यही वायदा किया था कि गंगा किनारे के गांवों को स्थायी रूप से बसाने की योजना बनाई जाएगी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर कुछ नहीं बदला। हर बार केवल आश्वासन और राहत सामग्री बांटने का दिखावा किया जाता है, जबकि बाढ़ पीड़ितों की वास्तविक समस्या जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि सरकार ने अब भी ठोस कदम नहीं उठाए तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस घटना से वहां मौजूद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया और मंत्री दिनेश खटीक को ग्रामीणों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि गंगा किनारे बसे गांवों की समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही है और हर साल हजारों लोग प्रभावित होते हैं, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी केवल अस्थायी मदद पर ही सीमित रह जाती है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बार-बार राहत पैकेट बांटने के बजाय यदि सरकार वाकई गंभीर है तो उसे वैकल्पिक जमीन पर स्थायी आवास योजनाएं बनानी होंगी। ग्रामीणों का दर्द यह है कि उनके बच्चे पढ़ाई-लिखाई में पीछे रह जाते हैं, रोज़गार छिन जाता है और स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो जाती हैं, फिर भी उन्हें केवल राशन या खाद्यान्न से बहलाने की कोशिश की जाती है। इस बार जब मंत्री खटीक स्वयं राहत सामग्री लेकर पहुंचे तो ग्रामीणों ने संगठित होकर साफ संदेश दे दिया कि अब वे केवल दिखावटी मदद से संतुष्ट नहीं होंगे। पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया कि गंगा किनारे बसे गांवों के लोग अब गंभीरता से स्थायी पुनर्वास की मांग को लेकर अड़े हुए हैं और सरकार को कोई ठोस नीति लानी ही होगी। इस दौरान कई ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि वे हर साल अपने टूटे मकानों को जोड़ते-जोड़ते थक चुके हैं, बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए ऊंचे स्थानों पर शरण लेते-लेते अब उनका सब्र जवाब दे रहा है। एक वृद्ध ग्रामीण ने यहां तक कहा कि सरकार उन्हें यदि रिहायशी प्लॉट्स उपलब्ध करा दे तो वे अपने जीवन की आखिरी सांस शांति से ले पाएंगे। मंत्री ने ग्रामीणों की पीड़ा सुनने के बाद उन्हें आश्वस्त किया कि वह मुख्यमंत्री तक उनकी मांग पहुंचाएंगे और जल्द ही सुरक्षित जमीन पर बसाने की योजना बनाई जाएगी। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि वे अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि जब तक धरातल पर ठोस कार्यवाही नहीं होती, तब तक वे किसी भी तरह की राहत सामग्री स्वीकार नहीं करेंगे। इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है बल्कि यह संदेश भी दिया है कि अब बाढ़ पीड़ित केवल अस्थायी मदद से बहलने वाले नहीं हैं, बल्कि स्थायी समाधान की मांग को लेकर दृढ़ हैं।
रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़, समृद्ध भारत समाचार पत्र
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