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“शिक्षक समाज की सेवा–सुरक्षा पर संकट! सरकार के फैसले से लाखों भविष्य अधर में”

सिद्धार्थनगर।

सिद्धार्थनगर से लेकर पूरे प्रदेश और देशभर में शिक्षक समाज इन दिनों भारी असमंजस और आक्रोश की स्थिति में है। मामला टीईटी (TET) परीक्षा एवं सेवा–सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, जिसको लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) तथा विभिन्न शिक्षकीय संगठनों ने प्रधानमंत्री तक गुहार लगाई है।

📌 मुद्दा क्या है?

1 सितंबर 2025 को आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर हाल ही में आए निर्णय ने हजारों-लाखों शिक्षकों की नौकरी और सेवा–सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है।

निर्णय के अनुसार, 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर सीधा असर पड़ेगा।

2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को सुरक्षा और नियमितिकरण का लाभ मिलेगा, जबकि बाद में नियुक्त शिक्षकों को भविष्य अनिश्चितता की ओर धकेल दिया गया है।

लाखों शिक्षकों की मेहनत और भविष्य अधर में लटक गया है।

📌 शिक्षकों की प्रमुख मांगें

शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में साफ कहा है कि—

1. निर्णय को Prospective (भावी) स्वरूप में लागू किया जाए यानी 2010 से पहले के शिक्षकों पर ही यह लागू हो, 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर नहीं।

2. सेवा–सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए।

वर्षों से कार्यरत शिक्षकों का जीवनभर का संघर्ष और मेहनत व्यर्थ न हो।

3. शिक्षक समाज को स्थायी समाधान दिया जाए।

हर हाल में शिक्षक भर्ती व सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार स्पष्ट नीति बनाए।

📌 शिक्षक संगठनों का आरोप

शिक्षक नेताओं का कहना है कि सरकार और विभाग के इस निर्णय से शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएगी।

एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात करती है, दूसरी ओर शिक्षक समाज को असुरक्षा और बेरोजगारी की ओर धकेल रही है।

यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

📌 सिद्धार्थनगर से उठी आवाज

सिद्धार्थनगर जनपद के राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक अपनी बात पहुँचाने की गुहार लगाई है।

जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार शुक्ल ने कहा कि यह निर्णय शिक्षक समाज के साथ अन्याय है।

जिला महामंत्री पंकज त्रिपाठी ने कहा कि अगर सरकार तुरंत समाधान नहीं निकालती तो शिक्षक समाज सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।

ज्ञापन पर कई शिक्षक नेताओं के हस्ताक्षर हैं और यह साफ संकेत है कि अब शिक्षक समाज चुप बैठने वाला नहीं है।

📌 सरकार पर बढ़ा दबाव

अब यह मुद्दा केवल सिद्धार्थनगर का नहीं रहा, बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर गूंज उठा है।

विपक्ष भी इस पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सरकार के खिलाफ शिक्षक वर्ग एकजुट होकर आंदोलन छेड़ेगा।

 

📌 निष्कर्ष

 

शिक्षक समाज का कहना है कि—

 

“हम वही हैं, जो नई पीढ़ी को गढ़ते हैं, लेकिन आज हमारी ही नौकरी और भविष्य असुरक्षित कर दिया गया है। सरकार को

चाहिए कि तुरंत न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान निकालकर शिक्षक समाज को भरोसा दिलाए।”

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