
दूल्हा बनने वाले दोस्त समेत दो की मौत,हादसे के तीसरे दिन भी मोहल्ले में मातम घरों में नहीं जले चूल्हे

हाटा कुशीनगर , हाटा नगर के वार्ड नंबर 20 गोपालनगर में रविवार देर रात हुए भीषण हादसे को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन पूरे मोहल्ले में अभी भी मातम छाया हुआ है। गलियों में पसरा सन्नाटा, दरवाज़ों पर बैठी महिलाएं और घरों में ठंडे पड़े चूल्हे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह हादसा सिर्फ दो जिंदगियां नहीं, बल्कि दो पूरे परिवारों का सहारा छीन ले गया। मृतक 23 वर्षीय अमित और 24 वर्षीय देवेंद्र , दोनों एक ही मोहल्ले के, एक ही उम्र के और एक-दूसरे के बेहद करीबी दोस्त थे। हादसे के दर्द ने पूरे वार्ड को अंदर तक हिला दिया है। अमित के घर में उसकी दो छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। पांच साल की अंशिका तुतलाते हुए कह रही है “पापा मर गए… अब नहीं आएंगे।” यह मासूम आवाज़ सुनकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें भर जा रही हैं।मां और पत्नी बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। अमित चार भाइयों दूसरे नंबर का था और पिता की मौत के बाद वही घर का सहारा बन गया था। ड्राइवर की नौकरी कर परिवार को संभाल रहा था, लेकिन किस्मत ने उसके छोटे बच्चों से पिता और मां से बेटा छीन लिया। दूसरी तरफ देवेंद्र का घर है, जहां मातम के बीच सजे हुए बरक्षा,बैंडबाजा,हलवाई की सट्टा, मैरिज हॉल तक बुक का स्लिप अब सिर्फ एक दर्दनाक याद बनकर रह गया है। 5 नवंबर को उसकी बारात जानी थी। रिश्तेदार और घर वाले उसी की शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन अब घर में सिर्फ चीख-पुकार गूंज रही है। तीन दिन बाद भी किसी के घर का चूल्हा नहीं जला। माता-पिता और भाई अब भी यकीन नहीं कर पा रहे कि दूल्हा बनने जा रहा बेटा अब लाश बनकर घर आया। हादसे वाली रात दोनों अपने दोस्त छोटू के साथ फूफा को छोड़ने गए थे। लौट कर हाटा आये। और अपने दोस्त छोटू को 3 किलोमीटर उसके घर में मदरहा छोड़ने चले गए। छोड़कर लौटते वक्त मंजिल से 2 किलोमीटर पहले ही सामने से आ रही तेज रफ्तार पिकअप ने उनकी वेगनार को जोरदार टक्कर मार दी, कार के परखच्चे उड़ गए और दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद आस-पड़ोस के लोग भी परिवारों के साथ खड़े हैं। बहुजन समाज पार्टी का एक प्रतिनिधि दल हरेंद्र गौतम और श्री राम के नेतृत्व में भी पहुंचा और प्रशासन से आर्थिक मदद दिलाने की बात कही। लेकिन इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब इन परिवारों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? अमित की बूढ़ी मां और दो छोटे बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा? और देवेंद्र के घर में जो शहनाई बजनी थी, वहां अब सिर्फ मातम का सन्नाटा गूंज रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे वार्ड को गहरे सदमे में डाल दिया है और लोग आज भी कह रहे हैं कि विनाश की इस खबर ने पूरे मोहल्ले की खुशियां छीन लीं।






