
सुकरौली में गोवर्धन पूजा पर महिलाओं ने परंपरा के अनुसार किया गोधन कुटाई

सुकरौली बाज़ार कुशीनगर सुकरौली में दीपावली के दूसरे दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा के अवसर पर सुकरौली क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ “गोधन कुटाई” की परंपरा निभाई गई। बुद्धवार को गांव की महिलाओं ने गोवर्धन पूजा के उपरांत गोबर से बने गोवर्धन महाराज की प्रतिमा की पूजा अर्चना कर ‘गोधन कुटाई’ की रस्म पूरी की। यह परंपरा गांवों में सदियों से चली आ रही है, जिसमें महिलाएं खेत, गौशाला और गांव की समृद्धि की कामना करती हैं।

सुबह से ही गांव की महिलाओं ने घरों की साफ-सफाई कर रंगोली और आंगन में अल्पना बनाई। फिर गोबर से गोवर्धन महाराज की आकृति बनाकर फूल, अक्षत, दीप और मिठाइयों से पूजन किया गया। बच्चों और युवाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। दिनभर महिलाएं पारंपरिक गीतों के साथ पूजन की तैयारी में लगी रहीं। दोपहर के समय में ही महिलाएं समूह बनाकर गोधन कुटने निकलीं और पारंपरिक गीत गाते हुए गोबर की प्रतिमा के आसपास लाठी व डंडों से प्रतीकात्मक गोधन कुटा।
इस मौके पर ‘गोधन कुटे, धन गढ़े’ जैसे पारंपरिक गीत गूंजते रहे। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से घर में सुख-समृद्धि आती है, पशुधन की वृद्धि होती है और गौ माता की कृपा बनी रहती है। साथ ही इस परंपरा के जरिए महिलाएं एकजुट होकर गांव की खुशहाली और समृद्धि की कामना करती हैं।
स्थानीय बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई जा रही है। यह आयोजन ग्रामीण संस्कृति और सामूहिकता का प्रतीक है, जिसमें सभी लोग मिल-जुलकर भाग लेते हैं। गोवर्धन पूजा के साथ गोधन कुटाई की यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य कर रही है।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई दी और प्रसाद का वितरण किया गया। पूजा के बाद महिलाओं ने सामूहिक भजन-कीर्तन भी किया। समूचा गांव भक्ति और उत्साह से सराबोर दिखा।






