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दिल्ली बनी अपराधियों की राजधानी।अमृता चौहान कौन है? लिव-इन पार्टनर UPSC यूपीएससी छात्र रामकेश मीणा को जिंदा जलाया, आखिर क्यों? सामने आई खौफनाक वजह

दिल्ली के राजधानी शहर के महरौली श्रद्धा वाकर मर्डर केस की यादें अभी ताजा हैं, लेकिन दिल्ली बनी अपराधियों की राजधानी में फिर एक ऐसा खौफनाक कत्ल सामने आया है, जिसने पूरे शहर को सिहरा दिया। महरौली से महज 30 किलोमीटर दूर गांधी विहार इलाके में UPSC यूपीएससी की तैयारी कर रहे 32 साल के रामकेश मीणा का जला हुआ शव मिला। शुरू में इसे गैस लीक का हादसा माना गया, लेकिन सच्चाई इतनी डरावनी थी कि पुलिस वाले भी कांप उठे।इस क्रूर हत्याकांड की मास्टरमाइंड निकली 21 साल की फॉरेंसिक साइंस की छात्रा अमृता चौहान-वही अमृता, जो अपराधों को विज्ञान की नजर से समझने का दावा करती थी।

  • विजय कुमार भारद्वाज/मुंबई
    दिल्ली बनी अपराधियों की राजधानी।अमृता चौहान कौन है? लिव-इन पार्टनर UPSC यूपीएससी छात्र रामकेश मीणा को जिंदा जलाया, आखिर क्यों? सामने आई खौफनाक वजह
    दिल्ली: दिल्ली के राजधानी शहर के महरौली श्रद्धा वाकर मर्डर केस की यादें अभी ताजा हैं, लेकिन दिल्ली बनी अपराधियों की राजधानी में फिर एक ऐसा खौफनाक कत्ल सामने आया है, जिसने पूरे शहर को सिहरा दिया। महरौली से महज 30 किलोमीटर दूर गांधी विहार इलाके में UPSC यूपीएससी की तैयारी कर रहे 32 साल के रामकेश मीणा का जला हुआ शव मिला। शुरू में इसे गैस लीक का हादसा माना गया, लेकिन सच्चाई इतनी डरावनी थी कि पुलिस वाले भी कांप उठे।इस क्रूर हत्याकांड की मास्टरमाइंड निकली 21 साल की फॉरेंसिक साइंस की छात्रा अमृता चौहान-वही अमृता, जो अपराधों को विज्ञान की नजर से समझने का दावा करती थी। अपने पूर्व प्रेमी और एक दोस्त की मदद से उसने रामकेश को गला दबाकर मारा, डंडे से पीटा, फिर घी-तेल-वाइन डालकर जिंदा जलाया।सबूत मिटाने के लिए LPG एल पी जी सिलेंडर का नॉब खोल दिया, ताकि लगे जैसे गैस ब्लास्ट हो गया। लेकिन CCTV, सीसीटीवी मोबाइल डेटा और फॉरेंसिक जांच ने इस ‘परफेक्ट मर्डर’ की पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया। आखिर क्यों अमृता ने रामकेश को इतनी बेरहमी से मौत दी? अपने एक्स-बॉयफ्रेंड सुमित कश्यप के साथ मिलकर शुरू की ‘बदला लेने’ की खूनी पटकथा। आइए जानते हैं… रामकेश मीणा यूपीएससी स्टूडेंट के आग की लपटों में छिपी थी खूनी साजिश: कैसे खुली हत्याकांड की परतें?
    6 अक्टूबर 2025 की वो काली सुबह, जब दिल्ली पुलिस को गांधी विहार के E-60 बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर आग लगने की सूचना मिली। दमकल विभाग की टीमें दौड़ीं, आग बुझाई गई, लेकिन अंदर का मंजर देखकर सबके रोंगटे खड़े हो गए। एक जली हुई लाश पड़ी थी-रामकेश मीणा की। 32 साल का ये युवक यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आया था, और उसी फ्लैट में रहता था। शव इतना झुलसा हुआ था कि पहचान मुश्किल हो रही थी, लेकिन दस्तावेजों से कन्फर्म हो गया। कमरे में बिखरी चीजें, गैस सिलेंडर का खुला नॉब और AC एसी ब्लास्ट जैसी हालत ने शुरू में इसे हादसा करार दिया। FIR एफ. आई.आर.भी आग से जुड़े BNS बीएनएस.सेक्शन के तहत दर्ज हुई। लेकिन क्राइम टीम और FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) की नजर में कुछ गड़बड़ थी-शव पर चोट के निशान, और कमरे में असामान्य जलन के पैटर्न। CCTV सीसीटीवी फुटेज में खुला अमृता चौहान का राज
    पुलिस ने तुरंत आसपास के CCTV सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया। और यहीं से सारी गुत्थी खुलने लगी। 5-6 अक्टूबर की देर रात, करीब 2:20 बजे, दो लोग मुंह ढके हुए बिल्डिंग में घुसे। 39 मिनट बाद, सिर्फ एक बाहर आया। फिर 2:57 बजे एक लड़की-बाद में अमृता चौहान के रूप में पहचानी गई-अपने साथी के साथ बाहर निकली। कुछ ही मिनटों बाद, आग भड़क उठी। पुलिस ने अमृता का मोबाइल डेटा (CDR) चेक किया, तो लोकेशन उसी रात गांधी विहार के आसपास ही थी। कॉल रिकॉर्ड्स में सुमित कश्यप और संदीप कुमार के नंबर बार-बार फ्लैश हो रहे थे। अब शक यकीन में बदल गया। तकनीकी सर्विलांस ने तीनों को ट्रैक किया, और 18 अक्टूबर को अमृता को मुरादाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने सब कबूल कर लिया। 18 से 23 अक्टूबर के बीच तीनों आरोपी पकड़े गए।
    रामकेश मीणा को क्यों अमृता ने मार डाला? क्राइम वेब सीरीज से ली इंस्पिरेशन
    अमृता चौहान (21) और रामकेश मीणा (32) की लिव-इन रिलेशनशिप मई 2025 में शुरू हुई थी। रामकेश UPSC यूपीएससी का सपना देख रहा था, अमृता फॉरेंसिक साइंस पढ़ रही थी। लेकिन रिश्ता बिगड़ गया, जब अमृता को पता चला कि रामकेश ने उसके निजी (ओब्सीन) वीडियो और फोटो हार्ड डिस्क में सेव कर रखे हैं। अमृता ने बार-बार डिलीट करने को कहा, लेकिन रामकेश ने साफ मना कर दिया। गुस्से में अमृता ने अपने एक्स-बॉयफ्रेंड सुमित कश्यप को ये बात बताई।सुमित, जो LPG एलपीजी सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूटर है, ने तुरंत साथ दिया। दोनों ने मिलकर संदीप कुमार को शामिल किया, और ‘बदला लेने’ की प्लानिंग शुरू हो गई। अमृता ने इसे ‘उसे सबक सिखाने’ का नाम दिया। क्राइम वेब सीरीज देखने की शौकीन अमृता ने ‘परफेक्ट मर्डर’ का आइडिया लिया-फॉरेंसिक नॉलेज से सबूत मिटाओ, और हादसा दिखाओ।
    अमृता के ठिकाने से हार्ड डिस्क (जिसमें वो निजी वीडियो थे), ट्रॉली बैग, रामकेश की शर्ट और दो मोबाइल फोन बरामद हुए। तिमारपुर पुलिस स्टेशन की टीम ने इस ब्रूटल मिस्ट्री को सुलझाया, जो वाकई एक ‘विज्ञान से बुनी गई हत्या की स्क्रिप्ट’ साबित हुई।आरोपी: फॉरेंसिक स्टूडेंट से LPG एलपीजी डीलर तक, ये हैं हत्यारे गैंग के चेहरे। कौन है अमृता चौहान?
    मुरादाबाद (पीतल नगरी) की रहने वाली, BSc बीएससी फॉरेंसिक साइंस की छात्रा है। क्राइम वेब सीरीज की शौकीन, इंस्टाग्राम पर रील्स पोस्ट करती थी (@ami110486)। हत्या से 5 दिन पहले 30 सितंबर को एक ट्रांजिशन रील अपलोड की, लेकिन रामकेश की कोई फोटो नहीं। फॉरेंसिक की जानकारी से साजिश रची।अमृता चौहान के गैंग में कौन-कौन?
    सुमित कश्यप (27): अमृता का पूर्व प्रेमी, मुरादाबाद निवासी। LPG एलपीजी सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूटर, जिसे गैस लीक और ब्लास्ट की परफेक्ट टाइमिंग पता थी। हत्या में गैस फैलाने का जिम्मा उसके पास।
    संदीप कुमार (29): मुरादाबाद का ग्रेजुएट, SSC/CGL की तैयारी कर रहा था। अमृता-सुमित का दोस्त, हत्या में फिजिकल अटैक का साथ दिया।खूनी रात: गला दबाया, पीटा, फिर जिंदा जलाया-सबूत मिटाने का वैज्ञानिक ‘फॉर्मूला’
    5-6 अक्टूबर की वो खौफनाक रात। तीनों आरोपी गांधी विहार पहुंचे। रामकेश सो रहा था। पहले गला दबाकर बेहोश किया, फिर डंडे से इतना पीटा कि मौत हो गई। अमृता ने फॉरेंसिक नॉलेज का इस्तेमाल किया-शव पर घी, तेल और वाइन उड़ेल दिया, ताकि आग तेज भड़के और DNA डीएनए सबूत जल जाएं। सुमित ने LPG एलपीजी सिलेंडर का नॉब खोला, गैस कमरे में फैलाई, शव के पास रखा और आग लगा दी। अमृता ने दरवाजे की जाली हटा दी, अंदर से गेट लॉक किया-ताकि लगे कि रामकेश अकेला था और हादसा हुआ। एक घंटे बाद धमाका हुआ, आग भड़क उठी। बाहर वालों को लगा AC एसी ब्लास्ट हो गया। लेकिन अमृता की चालाकी CCTV सीसीटीवी और मोबाइल डेटा ने धो डाली।ये केस सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि विश्वासघात और बदले की आग का प्रतीक है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है, और आरोपी को सख्त सजा दिलाई जाएगी। रामकेश का परिवार सदमे में है-उसका सपना UPSC यूपीएससी का था, लेकिन मिली मौत। क्या अमृता जैसी ‘विज्ञान की छात्रा’ अपराध की दुनिया में उतर आएगी? दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया, लेकिन ये सवाल बाकी है: प्राइवेसी का उल्लंघन कब बनेगा हत्या का बहाना? कब मिलेगी दिल्ली राजधानी को अपराधियों से मुक्ति। या सरकारी कागजों पर लीपापोती कर फाइल बंद कर दी जाएगी। फिर ऐसे जघन्य अपराधियो का कोई शिकार होगा। और सरकार की चुप्पी फिर से अपराधियों के हौसले को बढ़ावा देकर दिल्ली को असमाजिक तत्वों और अपराधियों का गढ़ बना अपनी राजनीतियों की रोटियां सेकती रहेगी। और किसी बहन बेटियों पर एसिड फेंका जाएगा तो कही किसी के भाई बेटों की मौत का मातम छाया रहेगा। आखिर कब तक बेखौफ अपराधी सरकार को हिजड़ा बना खूनी खेल खेलते रहेंगे। और शासन प्रशासन तमाशबीन बना रहेगा।
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