मुंबई के ट्रेन हादसे में मारी गई हेली की मां का फूटा दर्द। रेलवे, पुलिस या प्रदर्शनकारी, कौन लौटाएगा मेरी बेटी?
सपनों की माया नगरी कहे जाने वाली आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में जहां लाखों लोगों के सपने साकार होते है। लोग अपनी रोजी रोटी कमाकर अपने बच्चों परिवार का पालन पोषण करने के लिए अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर ट्रेन से सफर करते है। वही ट्रेन काल बनकर कई लोगों की जिंदगी छीन ली। बहुत ही दर्दनाक हादसा हुई। कई घरों के खुशियां मौत के ग्रास में समा गई। मुंबई में सैंडहर्स्ट रोड स्टेशन की ओर जा रहे यात्रियों को सेंट्रल रेलवे (सीआर) की एक लोकल ट्रेन ने टक्कर मार दी। जिससे दो लोगों की मौत हो गई। दो लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहें है। उन्होंने सीएसएमटी जाने वाली अपनी लोकल ट्रेन से उतरने का फैसला किया, जो सीआर यूनियन के विरोध प्रदर्शन के कारण रुकी थी। और एक दर्दनाक हादसा हो गया।
विजय कुमार भारद्वाज मुंबई के ट्रेन हादसे में मारी गई हेली की मां का फूटा दर्द। रेलवे, पुलिस या प्रदर्शनकारी, कौन लौटाएगा मेरी बेटी?
महाराष्ट्र/मुंबई : सपनों की माया नगरी कहे जाने वाली आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में जहां लाखों लोगों के सपने साकार होते है। लोग अपनी रोजी रोटी कमाकर अपने बच्चों परिवार का पालन पोषण करने के लिए अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर ट्रेन से सफर करते है। वही ट्रेन काल बनकर कई लोगों की जिंदगी छीन ली। बहुत ही दर्दनाक हादसा हुई। कई घरों के खुशियां मौत के ग्रास में समा गई।मुंबई में सैंडहर्स्ट रोड स्टेशन की ओर जा रहे यात्रियों को सेंट्रल रेलवे (सीआर) की एक लोकल ट्रेन ने टक्कर मार दी। जिससे दो लोगों की मौत हो गई। दो लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहें है। उन्होंने सीएसएमटी जाने वाली अपनी लोकल ट्रेन से उतरने का फैसला किया, जो सीआर यूनियन के विरोध प्रदर्शन के कारण रुकी थी। और एक दर्दनाक हादसा हो गया।‘उसे कौन लौटाएगा, पुलिस प्रदर्शनकारियों को क्यों नहीं रोक सकी… उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है, पुलिस, प्रदर्शनकारी या रेलवे? आज मैंने अपनी बेटी खोई है, कल कोई और अपनी बेटी खोएगा.. आम जनता को ही कब तक खोना पड़ेगा? ये सवाल हैं उस मां के जिन्होंने अपनी बेटी हेली को खो दिया। घटना शाम करीब 7.15 बजे की है। सैंडहर्स्ट रोड रेलवे स्टेशन (सेंट्रल लाइन प्लेटफॉर्म) पर ट्रेन के इंतजार में लोग खड़े थे। मध्य रेलवे के कर्मचारियों अचानक हड़ताल कर दी। अफरा-तफरी मच गई और सैंडहर्स्ट रोड रेलवे स्टेशन के पास अंबरनाथ जाने वाली एक फास्ट ट्रेन की चपेट में आने से दो यात्रियों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।
मुंबई ट्रेन हादसा
एक घंटे की हड़ताल ने पीक ऑवर्स के दौरान सेवाओं को ठप कर दिया था, जिससे हजारों लोग फंस गए और कई लोगों को उतरने और पैदल अपने गंतव्य तक पहुंचने का प्रयास करने के लिए मजबूर होना पड़ा। आंदोलन के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर सेवाएं रोक दी गई थीं जैसे ही हड़ताल समाप्त हुई और सेवाएं पुनः शुरू हुईं, अंबरनाथ फास्ट लोकल ट्रेन ने समूह को टक्कर मार दी।
पांच लोग लाए गए अस्पताल
पांचों को जेजे अस्पताल ले जाया गया, जहां 19 वर्षीय हेली मोहमाया और मीरा रोड निवासी 45 वर्षीय सूर्यकांत नाइक को मृत घोषित कर दिया गया। हेली की मौसी खुशबू के हाथ में फ्रैक्चर हो गया और उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दक्षिण मुंबई जा रही थी हेली
अस्पताल में मौजूद एक रिश्तेदार ने बताया कि हेली सोमैया कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी और खुशबू के साथ किसी काम से दक्षिण मुंबई जा रही थी। हेली के पिता प्रियेश मोहमाया शेयर बाज़ार में काम करते हैं और माटुंगा में रहते हैं। दो अन्य घायल यात्रियों, 62 वर्षीय याफ़िज़ा चौगुले और उनके 22 वर्षीय बेटे कैफ़ को भी दक्षिण मुंबई के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।
‘कल कोई और अपनी बेटी खोएगा…’
हेली मोमाया की मां ने बताया कि कल ही मैंने उसे फ़ोन करके घर वापस आने को कहा था। मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था, मैं पूरे दिन बेचैन रही – मानो मेरा दिल जानता था कि कुछ भयानक होने वाला है। और अब, मैं उसे फिर कभी नहीं देख पाऊंगी। मुझे उसका चेहरा भी आखिरी बार देखने का मौका नहीं मिला। हेली अपने पिता प्रियेश के साथ एक प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए रह रही थी और जब यह हादसा हुआ, तब वह फ्लोरा फ़ाउंटेन लौट रही थी। शीतल ने कहा कि रेलवे विरोध प्रदर्शन की वजह से मैंने अपनी बेटी खो दी। यह कैसा न्याय है? आम लोगों को अपने प्रियजनों की जान देकर इसकी कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है? उन्होंने कहा, ‘आज मैंने अपनी बेटी खो दी। कल, कोई और अपनी बेटी खो देगा। हममें से कितने लोगों को कुछ बदलने से पहले यह सब सहना होगा?’
भीड़ में घुटन से बचने को चलने लगीं पैदल
जीआरपी के एक अधिकारी ने कहा कि याफ़िज़ा की हालत गंभीर है और वह बेहोश है, जबकि कैफ़ को मामूली चोटें आई हैं। जीआरपी के अनुसार, मुंब्रा निवासी याफ़िज़ा और कैफ़ ने रुकी हुई ट्रेन में इंतज़ार करने के बाद सैंडहर्स्ट रोड स्थित एक रिश्तेदार के घर पैदल जाने का फैसला किया। उन्हें देखकर भीड़ भरे डिब्बे में घुटन महसूस कर रही हेली और खुशबू भी उतर गईं, उनके पीछे नाइक भी उतर गया। वे दूसरी तरफ जाने के लिए पटरी पर चलने लगे। हालांकि, लगभग उसी समय हड़ताल समाप्त हो गई और अंबरनाथ जाने वाली ट्रेन ने उन्हें टक्कर मार दी।
इंजीनियर्स पर FIR के खिलाफ हुई थी हड़ताल
जीआरपी ने जेजे अस्पताल में कैफ़ का बयान दर्ज किया है। यह अचानक हड़ताल जीआरपी के 1 नवंबर को मध्य रेलवे (सीआर) के दो इंजीनियरों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कथित लापरवाही के लिए एफआईआर दर्ज करने के विरोध में शुरू की गई थी। वह घटना जून में मुंब्रा में हुई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। एफआईआर के तुरंत बाद, यूनियनों ने चेतावनी दी थी और एफआईआर को जीआरपी की अनुचित कार्रवाई बताया था।
शाम करीब 5.30 बजे सीएसएमटी पर ट्रेनें रुकने से यात्री असमंजस में पड़ गए और सीआरएमएस व एनएफआईआर के बैनरों के साथ प्रदर्शनकारियों ने एफआईआर वापस लेने की मांग को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों के बाहर धरना दिया। हड़ताल के कारण मध्य रेलवे स्टेशनों पर अफरा-तफरी मच गई, जिससे सीएसएमटी, बायकुला और सैंडहर्स्ट रोड पर भीड़भाड़ बढ़ गई। शुरुआत में कोई घोषणा न होने से भ्रमित यात्री रुकी हुई ट्रेनों से उतर गए और पटरियों पर चलने लगे।
हेली के परिवार से मिले अफसर
शाम 6.30 बजे सेवाएं फिर से शुरू हुईं। सीएसएमटी जीआरपी प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों के रिश्तेदारों के बयान दर्ज कर रही है। स्थानीय विधायक अमीन पटेल ने जेजे अस्पताल का दौरा किया और हेली के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए हेली की मां ने पटेल से कहा कि मेरी बेटी को कौन लौटाएगा और पुलिस व्यस्त समय में विरोध प्रदर्शन करने वालों को क्यों नहीं रोक पाई। ऐसा लगता है कि यह सब निकम्मी सरकार की खामियां है। जो हर विभागों में सिर्फ झुनझुना बजाकर पल्ला झाड़ लेती है। और मरती बेचारी जनता है। महाराष्ट्र में एक तेज तर्रार कर्मस्ठ और लोकहित, देशहित और महाराष्ट्र की प्रगति के लिए अग्रसर होकर काम करे। और सभी पर पैनी नजर रखें। सिर्फ ढिंढोरा पीटने से और जनता सुरक्षित नहीं हो सकती है। आए दिन महाराष्ट्र में भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोरी, लैंड जिहाद में शासन, प्रशासन में बैठ लोग मस्त है। इसलिए आए दिन मारपीट, फ्रॉड, और हादसे बढ़ रहे है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। शासन, प्रशासन, या मासूम बेचारी मूर्ख बनी जनता जो भरोसा कर महाराष्ट्र की डोर को ऐसे हाथ में देती है। जो दावा तो करती है जनहित के लिए लेकिन सब खोखले नजर आते है। ऐसा जनता जनार्दन का कहना है। क्या ऐसे ही हादसे होते रहेंगे। किसी के जान की कोई परवाह नहीं है। खुद ही लोगों को अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखकर जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता रहेगा। और कागज की लीपापोती पर महाराष्ट्र की डोर रहेगी। या कड़क कार्रवाई और ठोस कदम भी उठाए जाएंगे।
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